श्रावस्ती। तराई में किसानों से मेघ नाराज हैं। इस वर्ष पिछले साल की तुलना में औसत से कम बारिश होने से जहां धान की नर्सरी प्रभावित है। वहीं जून के अंतिम सप्ताह में भी किसान धान की रोपाई न कर उसकी नर्सरी डालते देखे जा रहे हैं।प्री मानसून की बरसात से देश व प्रदेश के अन्य जिले पानी-पानी हो चुके हैं। जबकि तराई के खेतों में धूल उड़ रही है।
जनवरी व फरवरी में पानी की एक बूंद भी जिले में नहीं पड़ी। जबकि मार्च में 18.70 व अप्रैल में मात्र 3.50 एमएम बारिश हुई। वहीं मई भी पूरी तरह से सूखा रहा। जून में मात्र चार एमएम पानी बरसा। जो औसत 149.70 एमएम की अपेक्षा न के बराबर है। ऐसे में जिले की धरती तप रही है। शाम को खेतों में भरा जाने वाला पानी सुबह तक गायब हो जाता है। वहीं अब जब जून खत्म होने वाला है। तब भी खेतों में हरियाली के स्थान पर धूल उड़ रही है।
ताल-तलैयों के सूखने व जलस्तर के नीचे जाने के कारण सिंचाई के बावजूद खेतों की नमी कम हो रही है। ऐसे में पंपिंग सेट के सहारे धान की नर्सरी डाल चुके किसान बरसात न होने के कारण धान की रोपाई नहीं कर पा रहे है। वहीं हरिहरपुररानी व सिरसिया विकास क्षेत्र के ज्यादातर किसान अभी धान की नर्सरी भी नहीं डाल सके हैं।
इसके लिए किसान आसमान की ओर निहार रहे हैं। किसानों का मानना है कि यदि एक सप्ताह में बरसात न हुई तो धान की पैदावार काफी प्रभावित होगी। वहीं आसमान पर घुमड़ रहे काले बादलों के बिना बरसे लौट जाने से किसान परेशान हैं।
तराई में दिख रहा सूखे का आसार
माह औसत बरसात 2020 2021 2022 2023
जनवरी 21 00 00 45.70 00
फरवरी 21.70 36.90 1.30 34.90 00
मार्च 10.60 2.50 1.60 00 18.70
अप्रैल 7.90 10.50 12.50 00 3.50
मई 27.50 20.70 177.30 30.10 00
जून 149.70 316.60 432.60 69 04
इस वर्ष औसत से काफी कम बरसात हुई है। फिर भी अभी बरसात की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। किसान धान की नर्सरी डाल दें। संभव हो तो बिना रोपाई वाले मोटे धान बीज की बोआई करें, लाभ
करें, फायदा मिलेगा।
- डॉ. अवधेश कुमार यादव जिला कृषि अधिकारी संवाद