श्रावस्ती। दिव्यांग छात्रों को बेहतर शिक्षा मिल सके, इसके लिए उन्हें विशेष अभ्यास पुस्तकें दी गई हैं। विशेष पठन-पाठन के लिए प्रत्येक परिषदीय विद्यालय में एक शिक्षक को प्रशिक्षित कर नोडल बनाया गया है।
समग्र शिक्षा अभियान के तहत परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले दिव्यांग छात्रों को बेहतर शिक्षा प्रदान करने के लिए सामान्य पाठ्य सामग्री के साथ ही विशेष कार्य पुस्तक प्रदान की गई है। इसके माध्यम से छात्रों को शब्द पहचानने से लेकर लिखावट सुधारने तक का अभ्यास कराया जा रहा है। विद्यालयों में ऐसे बच्चे जो श्रवण दिव्यांग, अस्थि दिव्यांग, मानसिक मंदित, ऑटिज्म, सेरेब्रल पाल्सी से ग्रसित हैं, उनके लिए यह व्यवस्था लागू की गई है। कक्षा एक से आठ तक के बच्चों के लिए गणित व हिंदी विषय का अभ्यास कराया जा रहा है। (संवाद)
जिले में दर्ज हैं 2900 दिव्यांग बच्चे
जिले में 2900 दिव्यांग बच्चे विद्यालयों में दर्ज हैं। इनमें दृष्टि बाधित दिव्यांग बच्चों को छोड़कर 2652 बच्चों अभ्यास पुस्तक वितरित की गई है। इन दिव्यांग बच्चों को शिक्षित करने के लिए प्रत्येक विद्यालय से एक-एक शिक्षक को प्रशिक्षित कर नोडल नामित किया गया है। नोडल शिक्षकों को किसी प्रकार की समस्या होने पर जिले में तैनात 14 विशेषज्ञ शिक्षकों की ओर से समस्या का निदान किया जाएगा।
यह है पुस्तक की विशेषता
पुस्तक के माध्यम से छात्र लिखने, रंग भरने, जोड़ने, मिलान करने के क्रियाकलापों का अभ्यास बेहतर ढंग से कर सकते हैं। मानसिक कौशल बढ़ाने, हाथ व आंख का तालमेल और समस्या-समाधान की क्षमता विकसित करने वाले अभ्यास भी शामिल किए गए हैं।
वर्जन...
सभी दिव्यांग बच्चों के सीखने की गति और आवश्यकता अलग-अलग होती है। ऐसे में उनकी जरूरत के अनुसार कार्य पुस्तिका तैयार की गई है। इससे उन्हें शिक्षा ग्रहण करने में आसानी होगी।
- अजय कुमार, बीएसए