श्रावस्ती। ग्रामीण क्षेत्र के युवाओं को बेहतर शिक्षा मिल सके इसके लिए शासन गांव-गांव डिजिटल लाइब्रेरी बनाने की कवायद कर रहा है। इसके लिए जुलाई 2025 में पंचायती राज विभाग ने गांवों का चयन किया गया था, लेकिन अब तक डिजिटल लाइब्रेरी योजना फाइलों में ही चल रही है। किसी भी ग्राम सचिवालय में इस योजना के तहत कराए गए कार्य नजर नहीं आ रहे हैं।
डिजिटल लाइब्रेरी बनाने की कवायद शूरू होने से ग्रामीण क्षेत्र के युवाओं में उम्मीद जगी थी। इससे उन्हें ऑनलाइन शिक्षा हो या फिर विभिन्न किताबों के पढ़ने के लिए गांव में ही सुविधाएं मिल जाएंगी। बोर्ड परीक्षा की तैयारी में भी उन्हें समस्या का सामना नहीं करना पड़ेगा। वहीं, सात माह बीतने के बाद भी अब तक डिजिटल लाइब्रेरी की सुविधा न मिलने से लोगों में निराशा है। अब तक लाइब्रेरी के संचालन के लिए महज बिड प्रक्रिया ही शुरू हो सकी है। विदित हो कि पहले चरण में जिले की 397 ग्राम पंचायतों में से 161 गांवों के ग्राम सचिवालयों में डिजिटल लाइब्रेरी बनाने की कवायद शुरू हुई थी। डिजिटल लाइब्रेरी की स्थापना के लिए प्रति गांव चार लाख रुपये खर्च किए जाएंगे, जिसमें 90 हजार की एनबीटी पब्लिकेशन की किताबें, 90 हजार की अन्य पब्लिकेशन की किताबें व 20 हजार रुपये की कानूनी किताबें मौजूद रहेंगी।
यह सुविधाएं भी मिलेंगी
डिजिटल लाइब्रेरी में इंटरनेट सुविधा के साथ कंप्यूटर, प्रोजेक्टर, कुर्सी आदि की भी व्यवस्था रहेगी। कंप्यूटर समेत अन्य उपकरणों के आपूर्ति की जिम्मेदारी यूपी डेस्को को दी गई है। साथ ही विभिन्न कोचिंग संस्थानों की ऑनलाइन कक्षाओं का भी लाभ युवाओं को मिलेगा। वहीं, डिजिटल लाइब्रेरी के संचालन की जिम्मेदारी पंचायत सहायकों को सौंपी जाएगी।
डिजिटल लाइब्रेरी संचालन के लिए एनबीटी व यूपी डेस्को को कार्य आदेश भेजा गया है। शीघ्र ही संचालन की प्रक्रिया और तेज होने की उम्मीद है। लोगों को जल्द ही इसका लाभ मिलेगा।
- अश्वनी कुमार, प्रभारी डीपीआरओ