श्रावस्ती। जिले के लिए जीवनदायिनी मानी जाने वाली राप्ती नदी शिक्षा के मंदिरों को मिटाने को आतुर है। पिछले वर्ष बाढ़ के दौरान जहां कुछ विद्यालयों को काटकर नदी खुद में समाहित कर चुकी है तो वहीं कई विद्यालय अब भी नदी के निशाने पर हैं। यदि ध्यान न दिया गया तो इन विद्यालयों का इस वर्ष बाढ़ में नामोनिशान मिट सकता है।
नेपाल से निकलने वाली राप्ती नदी जमुनहा क्षेत्र के जनशून्य राजस्व ग्राम शिवपुर भागड़ व ग्राम पंचायत ककरदी से देश सहित जिले की सीमा में प्रवेश करती है। नदी हरिहरपुररानी व गिलौला होते हुए करीब 59 किलोमीटर का सफर तय कर इकौना के ग्राम राजगढ़ गुलहरिया से बलरामपुर जिले की सीमा में प्रवेश करती है।
इस बीच करीब 144 गांव राप्ती नदी के कछार में पड़ते हैं जहां प्रतिवर्ष बरसात में बाढ़ के दौरान राप्ती की लहरें कहर बरपाती हैं। इससे इन गांव में बने प्राथमिक विद्यालय व आंगनबाड़ी केंद्र भी अछूते नहीं है।
मौजूदा समय जिले के सात प्राथमिक विद्यालय बेलरी, बारंगा, अलीनगर, मनिकापुर, सुजानडीह, कलकलवा व गंगाभागड़ का अस्तित्व संकट में है। इन्हें बचाने का इंतजाम न किया गया तो इस वर्ष बाढ़ के दौरान इन विद्यालयों सहित वहां बने आंगनबाड़ी केंद्र का नामोनिशान मिट सकता है।
पूर्व में राप्ती नदी में आई बाढ़ में जमुनहा क्षेत्र का प्राथमिक विद्यालय कट गया था। बाद में यहां नया विद्यालय व आंगनबाड़ी केंद्र का निर्माण कराया जा रहा है। यह कलकलवा मार्जिनल बांध व नदी के मध्य स्थित है। इससे यहां फिर से कटान का खतरा बना है।
जमुनहा क्षेत्र के इस विद्यालय परिसर की अधिकांश भूमि को राप्ती नदी काट चुकी है। अब विद्यालय भवन नदी की कटान के मुहाने पर है। इसे बचाने के लिए कोई इंतजाम नहीं किया गय तो विद्यालय का वजूद मिट सकता है।
जमुनहा क्षेत्र के इस विद्यालय को पहले ही काटकर नदी अपनी धारा में मिला चुकी है। अब यहां नए भवन का निर्माण कराया जा रहा है। राप्ती के उद्गम क्षेत्र होने के कारण यहां नदी तबाही मचाती है। ऐसे में इसके फिर से कटान की जद में आने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता।
गंगाभागड़ में विद्यालय बना है। कलकलवा के विद्यालय को बाढ़ आपदा केंद्र से संचालित किया जा रहा है। हरिहरपुररानी के बारंगा व अलीनगर में विद्यालय कट चुका है। मनिकापुर व सुजानडीह में विद्यालय बनवाया जा रहा है जबकि कलकलवा विद्यालय नदी के मुहाने पर है।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ओंमकार राणा ने बताया कि डीएम द्वारा संभावित बाढ़ की तैयारियों की समीक्षा की गई है। इस दौरान डीएम को इन सभी सात विद्यालयों की स्थित से अवगत कराया जा चुका है। जो भी सुरक्षा कार्य होगा वह डीएम के स्तर से ही होगा।