कटरा। बुद्ध की तपोस्थली श्रावस्ती में शनिवार को बर्मा के बौद्ध अनुयायियों ने बौद्ध भिक्षु देवानंद की अध्यक्षता में बोधिवृक्ष की पूजा-अर्चना की। इसके बाद भिक्षु ने सभा का आयोजन कर अनुयायियों को उपदेश दिया। इसके बाद अनुयायी परिसर का भ्रमण कर उसके इतिहास की जानकारी ली।
सभा के दौरान बौद्ध भिक्षु ने कहा कि बुद्ध की शक्तियों का स्रोत आध्यात्मिक ज्ञान, गहन ध्यान और आत्म-अनुशासन है। इन नियमों का पालन करके कोई भी भगवान बुद्ध की कृपा का पात्र बन सकता है। बौद्ध धर्म में ये शक्तियां मुख्य रूप से अनुभव-ज्ञान, विवेक, प्रज्ञा और करुणा के रूप में प्रकट होती हैं, जो लोगों को मुक्ति की ओर जाने में सक्षम बनाती हैं।
बुद्ध ने अपने ज्ञान और विवेक का उपयोग अज्ञानता को दूर करने और लोगों को सच्चाई का मार्ग दिखाने के लिए किया है। बुद्ध के पास प्रज्ञा थी, जिससे वह सत्य और असत्य में भेद कर पाते थे और तर्कपूर्ण ढंग से लोगों के संदेह का समाधान करते थे।
बौद्ध भिक्षु देवानंद ने आगे बताया कि गहन ध्यान और आत्म-अनुशासन के माध्यम से बुद्ध ने उन अनुभवों को प्राप्त किया, जो सामान्य मनुष्यों के लिए संभव नहीं थे। बुद्ध ने धर्म और आध्यात्मिकता के गहन अध्ययन से अलौकिक क्षमताओं को प्राप्त किया। इस दौरान काफी संख्या में बौद्ध अनुयायी मौजूद रहे।