कटरा (श्रावस्ती)। बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती शनिवार को श्रीलंका से आए अनुयायियों से गुलजार रही। इस दौरान अनुयायियों ने गंध कुटि पर विशेष वर्षावास पूजा की। दल के सदस्यों ने तपोस्थली के विभिन्न मूमेंटों का भ्रमण कर विश्व शांति की कामना भी की।
इस दौरान बौद्ध भिक्षु दीपालोक महाथेरो ने कहा कि एक बार बुद्ध एक गांव में अपने किसान भक्त के यहां गए थे। यहां बुद्ध का प्रवचन सुनने के लिए गांव के सभी लोग उपस्थित थे, लेकिन वह किसान ही कहीं दिखाई नहीं दे रहा था।
गांव के लोगों में चर्चा होने लगी कि कैसा भक्त है कि प्रवचन का आयोजन करके स्वयं गायब हो गया। प्रवचन खत्म होने के बाद सब लोग घर चले गए। रात में किसान घर लौटा। इस पर बुद्ध ने पूछा, कहां चले गए थे। गांव के सभी लोग तुम्हें पूछ रहे थे। किसान ने कहा, दरअसल प्रवचन की सारी व्यवस्था हो गई थी, पर तभी अचानक मेरा बैल बीमार हो गया।
पहले तो मैंने घरेलू उपचार करके उसे ठीक करने की कोशिश की, लेकिन जब उसकी तबीयत ज्यादा खराब होने लगी तो मुझे उसे लेकर पशु चिकित्सक के पास जाना पड़ा। अगर नहीं ले जाता तो वह नहीं बचता। आपका प्रवचन तो मैं बाद में भी सुन लूंगा।
अगले दिन सुबह जब गांव वाले फिर बुद्ध के पास आए तो उन्होंने किसान की शिकायत करते हुए कहा, यह तो आपका भक्त होने का दिखावा करता है। इस पर बुद्ध ने उन्हें पूरी घटना सुनाई और फिर समझाया, उसने प्रवचन सुनने की जगह कर्म को महत्व देकर यह सिद्ध कर दिया कि मेरी शिक्षा को उसने ठीक ढंग से समझा है। उसे अब मेरे प्रवचन की आवश्यकता नहीं है। मैं
यही तो समझाता हूं कि अपने विवेक और बुद्धि से सोचो कि कौन सा काम पहले किया जाना जरूरी है। इस दौरान श्रीलंका से आए अनुयायियों ने कौशांबी कुटि, शिवली स्तूप, सभामंडप, सूर्यकुंड, आनंद बोधि, अंगुलिमाल स्तूप आदि का भ्रमण कर उसकी ऐतिहासिक जानकारी ली। मौके पर आनंद सागर, धम्म सागर, सुख सागर आदि बौद्ध भिक्षु मौजूद रहे।