बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती में बोधिवृक्ष का दर्शन-पूजन करते थाईलैंड के अनुयायी। -संवाद
कटरा। बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती शनिवार को थाईलैंड से आए अनुयायियों के 40 सदस्यीय दल से गुलजार रही। सभी ने भिक्षु देवानंद के नेतृत्व में पारंपरिक तरीके से बोधिवृक्ष का पूजन-अर्चन किया। इस दौरान बौद्ध सभा का भी आयोजन किया गया।
बौद्ध सभा को संबोधित करते हुए भिक्षु देवानंद ने बताया कि गौतम बुद्ध का जन्म 623 ईसा पूर्व दक्षिणी नेपाल के लुम्बिनी प्रांत में हुआ था। वे शाक्य वंश के मुखिया शुद्धोधन और कोलीय राजकुमारी माया के पुत्र थे। उनका बचपन का नाम सिद्धार्थ था।
सिद्धार्थ के जन्म पर ज्योतिषियों ने उनके महान ऋषि या बुद्ध बनने की भविष्यवाणी की थी। कपिलवस्तु की गलियों में भ्रमण के दौरान एक वृद्ध, एक बीमार व एक शव देखकर वह विचलित हो गए। उनके सारथी ने उन्हें समझाया कि सभी प्राणी वृद्धावस्था, रोग और मृत्यु के अधीन हैं। मानवीय कष्टों को देखकर बुद्ध को शांति नहीं मिली।
उन्होंने एक भटकते हुए तपस्वी को देखा और समझा कि तपस्या से दुखों पर विजय पाई जा सकती है। इसी विचार के साथ उन्होंने अपने राज्य का त्याग कर दिया। उनका लक्ष्य सभी दुखों के मूल कारण को समझना और उसका समाधान खोजना था।