गंधकुटी पर प्रार्थना करते अनुयायी।
कटरा (श्रावस्ती)। बुद्ध की तपोस्थली श्रावस्ती शुक्रवार को अनुयायियों से गुलजार रही। तपोस्थली पहुंचे महाराष्ट्र के 51 सदस्यीय दल ने भिक्षु देवानंद की अध्यक्षता में गंधकुटी पर प्रार्थना की।
इस दौरान भिक्षु देवानंद ने कहा कि बौद्ध धर्म के अनुसार इस संसार के सभी दुखों का एक मात्र कारण अज्ञानता है। अत: बौद्ध कालीन शिक्षा में छात्रों को सच्चे व सार्थक ज्ञान के विकास पर बल दिया जाता था। बौद्ध काल में सच्चे ज्ञान से अभिप्राय धर्म व दर्शन के चार सत्यों के ज्ञान और उसी के अनुरूप आचरण करने से था। बौद्ध कालीन शिक्षा का एक मुख्य उद्देश्य बालकों का चरित्र-निर्माण करना था। चरित्र-निर्माण के लिए आत्म संयम, करुणा और दया को अत्यधिक महत्व दिया गया। जो बालक इन गुणों का पालन करता था उसे चरित्रवान माना जाता था। चरित्र-निर्माण के लिए मठों व विहारों में दस नियमों का पालन कराया जाता था तथा सादा जीवन जीने व विनय पूर्ण व्यवहार करने के लिए छात्रों को प्रशिक्षित किया जाता था। बौद्ध कालीन शिक्षा का एक उद्देश्य विभिन्न व्यवसायों की शिक्षा भी देना था। इस दौरान काफी संख्या में अनुयायी मौजूद रहे।