जेतवन में पूजा करते थाईलैंड के अनुयायी।- संवाद
कटरा। बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती बृहस्पतिवार को थाईलैंड से आए अनुयायियों के 60 सदस्यीय दल से गुलजार रही। सभी ने बौद्ध भिक्षु देवानंद के नेतृत्व में जेतवन परिसर में पारंपरिक ढंग से पूजा-अर्चना व परिक्रमा की। इस दौरान बौद्ध सभा का भी आयोजन किया गया।
बौद्ध सभा को संबोधित करते हुए भिक्षु देवानंद ने कहा कि एक बार एक महिला वन की छाया में रो रही थी। उसका रोना संसार के पुराने दुखों का विस्तार था। वह बार-बार अम्म जीवति कहती थी, जैसे मृत्यु को झुठला देगी।
वन की भूमि उसके अश्रुओं से गीली थी और उसके हृदय में एक अदृश्य शूल धंसा था। वह कोई साधारण स्त्री नहीं, बल्कि सुख-सुविधाओं में पली उब्बिरी नामक स्त्री थी, जो अपनी पुत्री को खोज रही थी।
उधर से गुजरे भगवान बुद्ध ने कहा कि उब्बिरी अपने को पहचानो, इस वन में तुम किसे खोज रही हो। बुद्ध के शब्दों ने उब्बिरी को आईना दिखाया। उन्होंने समझाया कि चौरासी हजार नामधारी जीव इस संसार में जी चुके हैं और उन सभी की मां व पुत्रियां थीं।
बुद्ध की बातों से उब्बिरी को एहसास हुआ कि उसकी पुत्री मृत्यु में अकेली नहीं थी, बल्कि असंख्य जन्मे लोग मौत का शिकार हो चुके हैं। बुद्ध की बातों से उब्बिरी को सत्य का बोध हुआ और वह भिक्षुणी बन गई। सभा के बाद अनुयायियों ने तपोस्थली का भ्रमण किया।