जेतवन परिसर का भ्रमण करते अनुयायी।
कटरा (श्रावस्ती)। बुद्ध की तपोस्थली श्रावस्ती बुधवार को अनुयायियों से गुलजार रही। महाराष्ट्र से आए अनुयायियों ने भिक्षु देवानंद के नेतृत्व में आनंद बोधि पर प्रार्थना की। साथ ही तपोस्थली का भ्रमण कर बुद्धम शरणम गच्छामि, धम्मम शरणम गच्छामि का उद्घोष किया।
इस दौरान भिक्षु देवानंद ने कहा कि बुद्ध ने सृष्टि का विश्लेषण कारणवाद के आधार पर किया। इसमें विवेक पर आधारित तर्क की प्रधानता थी। यह एक तरह से भारत के धर्मों के इतिहास में क्रांति थी। हालांकि यह धर्म काफी उदार और जनतांत्रिक भी था। इसमें सत्य, अहिंसा, प्रेम और करुणा पर काफी जोर था। भगवान बुद्ध ने यथार्थ के सही स्वरूप को पहचान कर मनुष्य को अपनी पूरी मानवीय क्षमताओं का विकास करने और जीवन मरण के चक्र से छुटकारा पाकर मुक्ति प्राप्त करने के सरल, सहज और सुगम राह दिखाई। बुद्ध की सिखाई शिक्षा ने अहिंसा और जीव मात्र के प्रति दया की भावना जगाकर न केवल मनुष्य बल्कि पशुओं के प्रति भी अपने प्रेम को उजागर किया।