श्रावस्ती। भिनगा तहसील के निकट सर्वामाई धाम में 11 दिवसीय श्रीविष्णु महायज्ञ का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें बुधवार को कथा व्यास ने भागवत कथा का महत्व व शिव विवाह की कथा का गुणगान किया।
कथा के दौरान दिल्ली से आए रसिक मूर्ति संत रमन शास्त्री ने कहा कि मनुष्य को जब भी मौका मिले उसे भागवत कथा का श्रवण अवश्य करना चाहिए। कथा का रसपान करने से मानव के जन्मों-जन्मों के पाप धुल जाते हैं। प्रभु ने मनुष्य का तन सिर्फ खाने और खिलाने के लिए नहीं दिया है। बल्कि कुछ भजन और स्मरण करने के लिए बना है। सबसे व्यस्त जीवन के इस दौर में हमें प्रभु के लिए आधा से एक घंटा का समय अवश्य निकालना चाहिए। भगवान के भजन से मन और तन को शांति मिलती है।
शिव विवाह की कथा का गुणगान करते हुए उन्होंने कहा कि जिस प्रकार से सती का तन त्याग करके भगवान को प्राप्त करने के लिए पार्वती ने कठिन तपस्या की। हजारों वर्ष की कठिन तपस्या के बाद में उन्हीं शिव का सानिध्य प्राप्त हुआ। इसी प्रकार से 84 लाख योनियों में जीव आत्मा भटकती है। कठिन परिश्रम करने के बाद उसे मानव का जीवन प्राप्त होता है। मानव जन्म में भी वह परमात्मा को न प्राप्त कर सके तो उसके जन्म से कोई लाभ नहीं है। इस मौके पर काफी संख्या में लोग मौजूद रहे।