श्रावस्ती। राप्ती नदी का जलस्तर अब धीरे-धीरे घटने लगा है। घटते जलस्तर के साथ नदी की लहरें किनारे पर स्थित खेत, सड़क व मकान तेजी से काट रही है। जलस्तर घटने के बावजूद अब भी इकौना सहित कछार के 87 गांव बाढ़ की चपेट में हैं। वहीं, भिनगा-इकौना मार्ग पर आवागमन अब भी बाधित है।
राप्ती नदी की कछार में बसे ग्रामीणों के लिए राहत है कि नदी का जलस्तर तेजी से कम हो रहा है। राप्ती बैराज पर बुधवार शाम तीन बले नदी का जलस्तर 127.90 मीटर रहा जो खतरे के निशान से बीस सेंटीमीटर अधिक है। इसके साथ ही जमुनहा व हरिहरपुररानी क्षेत्र के 45 गांवों में बाढ़ का खतरा टल चुका है। हालांकि, इन गांवों में घटते जलस्तर के साथ राप्ती की लहरें अपने किनारे पर स्थित गांव, घर व खेत खलिहान सहित मार्गों पर तेजी से कटान कर रही हैं जिसे देखते हुए ग्रामीण स्वयं अपने हाथों अपना आशियाना तोड़ रहे हैं।
वहीं, गिलौला व इकौना सहित हरिहरपुररानी क्षेत्र के करीब 87 गांव अब भी बाढ़ की चपेट में हैं। इनमें से करीब 40 गांव जहां बाढ़ से पूरी तरह डूबे हुए हैं। वहीं करीब 47 गांव टापू बने हुए हैं। इन गांवों में एक से डेढ़ फिट पानी भरा हुआ है। बाढ़ के कारण करीब दो लाख की आबादी अब भी प्रभावित है। वहीं फ्लड पीएसी व एनडीआरएफ सहित स्थानीय पुलिस व लेखपाल लोगों को मदद पहुंचा रहे हैं। इसके बावजूद ज्यादातर बाढ़ प्रभावित लोगों तक मदद नहीं पहुंच पा रही है। जिससे लोग परेशान हो रहे हैं।
जमुनहा क्षेत्र में बाढ़ प्रभावितों के लिए भेजी जाने वाली लंच पैकेट में ठेकेदार अनियमितता बरत रहे हैं। ग्रामीणों की मानें तो उन्हें लंच पैकेट में 20-20 ग्राम की नौ पूड़ी व 50 ग्राम आलू की सब्जी ही दी जा रही है। वहीं, सब्जी से दुर्गंध आने के कारण लोग फेंक रहे हैं। ऐसे में ग्रामीणों ने तहसीलदार जमुनहा को लंच पैकेट दिखा कर इसकी शिकायत की। इस पर तहसीलदार ने ठेकेदार को फटकार लगाते हुए शुद्ध भोजन देने अन्यथा भुगतान रोकने की चेतावनी दिया है।
राप्ती की बाढ़ भले ही जमुनहा क्षेत्र के गांवों में राहत दे गई हो लेकिन उसकी तबाही के निशान अब भी बाकी हैं। बाढ़ में अपना सब कुछ खो चुके ग्रामीणों के सामने अब घरों में जमा सिल्ट निकालने की समस्या आ गई है। इन गांवों में मुख्य मार्ग, संपर्क मार्ग व खेत सहित लोगों के घरों में डेढ़ से दो फीट तक सिल्ट जमा हो चुकी है जिसे हटाने के लिए उन्हें मशक्कत करनी पड़ रही है। वहीं, बाढ़ में बर्बाद हुई फसलों पर जमा सिल्ट के कारण अब फसल दिखाई नहीं दे रही है।
जिन घरों में बाढ़ का पानी भरा है उनमें डेहरी आदि में रखा गेहूं, चावल, धान, सरसों, उर्द सहित अन्य अनाज पूरी तरह से बर्बाद हो चुका है। इसे बाढ़ का पानी कम होने के बाद ग्रामीण बचाने के लिए सुखा रहे हैं।
राप्ती की कछार में बसे भोजपुर सहित कई अन्य गांवों में बाढ़ के कारण फूस के छप्पर, खपरैल व कच्चे पक्के मकान गिर गए। इससे इन घरों में रहने वाले लोगों ने सड़क पर ठिकाना बनाया है। तमाम ग्रामीण नहर की पटरियों व ऊंचे स्थानों पर जाकर डेरा जमाए हुए हैं। जमुनहा के ऐंठा गांव में जंगली प्रसाद, जोखन, गोबरे, मनोरथ, कनछेद, श्यामलाल, रमेश कूूमार व फुलकोरा का घर गिर गया।
कटरा विद्युत उपकेंद्र में भरा बाढ़ का पानी पंपिंग सेट लगा कर निकाला जा चुका है। मलबा निकाला जा रहा है। बृहस्पतिवार को धूप निकली तो देर रात तक उपकेंद्र का संचालन प्रारंभ करा दिया जाएगा। ऐसे में तपोस्थली व कटरा बाजार सहित आसपास के ग्रामीणों को सहूलियत मिलेगी।
गायत्री परिवार की ओर से वरना मंदिर परिसर में राहत शिविर संचालित कर लोगों को भोजन कराया जा रहा है। यहां मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन समारोह में सीतापुर से आईं महिलाएं सुबह-शाम खाना बनाकर स्थानीय लोगों को परोस रहीं हैं।