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मां कूष्मांडा के चरणों में नवाया शीश, मंदिरों में उमड़े भक्त

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श्रावस्ती। चैत्र नवरात्र के चौथे दिन मंगलवार को देवी मंदिर मां के जयकारों से गूंज उठे। देवी मंदिरों में मां के चौथे स्वरूप मां कूष्मांडा की आराधना विधिविधान से हुई। दर्शन के लिए मंदिरों में श्रद्धालु दिनभर उमड़ते रहे। भोर होते ही मंदिरों में घंटे बज उठे। नवरात्र पर भिनगा नगर के राजर्षि काली मंदिर, इकौना के बेचूबाबा, माता ज्वाला देवी मंदिर, जमुनहा के जगपति धाम, सिरसिया के दुर्गामंदिर, गिलौला के झारखंडी व सदाशिव महादेव मंदिर पर श्रद्धालुओं का तांता दिनभर लगा रहा। लोगों ने मां कूष्मांडा की विधिविधान पूर्वक पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि की कामना की। इस दौरान देवी मंदिरों में बजने वाले गीतों व बधाइयों से माहौल देवीमय बन गया। नगर सहित ग्रामीण क्षेत्रों में भक्तों ने विभिन्न देवी मंदिरों में पहुंचकर मां के चौथे स्वरूप की विधिविधान पूर्वक पूजा-अर्चना की।
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जमुनहा (श्रावस्ती)। हरदत्त नगर गिरंट जंगल स्थित भगवानपुर भैंसाही की फकीरा समय माता अपने भक्तों को मनवांछित फल देती हैं। इसके चलते यहां नवरात्र व कार्तिक पूर्णिमा पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ एकत्र होती है। मल्हीपुर बाबागंज मार्ग स्थित भगवानपुर भैंसाही गांव कभी हरदत्त नगर गिरंट के जंगल का अंश हुआ करता था। ऐसी मान्यता है कि भगवान नाम का एक थारू (अनुसूचित जनजाति) अपनी सात कन्याओं के साथ यहां रहता था। उसके द्वारा अपनी सबसे छोटी कन्या को जिंदा दफन कर उसकी समाधि बना दी गई थी। इसके बाद वह कहीं चला गया। करीब दो शतक पूर्व हरदत्त नगर गिरंट के जंगल में मवेशी चराने गए कुछ चरवाहों को जंगल में एक कन्या की आवाज सुनाई पड़ी। उसने कहा कि मंदिर बनवाओ तो क्षेत्र का कल्याण होगा। आवाज सुनकर आसपास तलाश करने पर चरवाहों को झाड़ियों के बीच एक समाधि दिखाई पड़ी। उन्हें बराबर आवाज सुनाई दी।
इस आवाज को सुनने के बाद चरवाहों ने उस स्थान पर पूजा शुरू कर दी। धीरे-धीरे यह स्थान फकीरा समय माता स्थान के नाम से प्रसिद्ध हुआ। यहां ग्रामीणों द्वारा पूर्व के चार पुजारियों की समाधि, हवन कुंड, व्यास आसन सहित पुजारी के रहने के लिए खपरैल का मकान आदि का निर्माण कराया गया। यहां प्रत्येक सोमवार व गुरुवार को विशाल मेला लगता है। यहां आने वाले श्रद्धालुओं द्वारा मांगलिक आयोजनों के साथ भंडारा भी किया जाता है। साथ ही दशहरा व कार्तिक पूर्णिमा पर मेले का आयोजन किया जाता है। मान्यता है कि जो भी भक्त सच्चे दिल से मां की आराधना करता है। फकीरा समय माता उसे मनोवांछित फल देती हैं।
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