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ग्राम सचिवालयों का बुरा हाल, बना दिया तबेला

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पकड़िया में बना ग्राम सचिवालय बदहाल - फोटो : SRAWASTI
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श्रावस्ती। गांव के विकास की रूपरेखा तय करने व खुली बैठकों का आयोजन कराने के लिए बनवाए गए ग्राम सचिवालय उपेक्षित हैं। कई गांवों में देखरेख के अभाव में ग्राम सचिवालय में लगवाए गए खिड़की दरवाजे व ईंट एक-एक कर चोर उठा ले गए। कई गांव में उपेक्षा के कारण ग्रामीण उसमें भूसा, पुआल व कंडे आदि रख रहे हैं। कुछ ग्राम सचिवालयों पर ग्रामीण कब्जा कर उसे निजी प्रयोग में ले रहे हैं। कई गांवों में बने ग्राम सचिवालयों को ग्रामीणों को तबेला बना दिया है। जिसमें उनके द्वारा मवेशी बांधे जा रहे हैं।
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जमुनहा के बदला में बने ग्राम सचिवालय पर बदला चौकी पर तैनात पुलिस कर्मियों ने कब्जा कर रखा है। देखा जाए तो जिले में बसपा शासनकाल के दौरान पहले चरण में 144 ग्राम सचिवालयों का निर्माण कराया गया था। जबकि बाद में मल्टी सेक्टोरियल डेवलेपमेंट प्रोग्राम व बार्डर एरिया डेवलेपमेंट प्रोग्राम सहित अन्य योजनाओं से 112 ग्राम सचिवालय का निर्माण कराया गया था। इनमें अधिकांश सचिवालय बदहाल हैं।
ग्राम चौगोई के मजरा जोगिया गांव में बना ग्राम सचिवालय बदहाल है। जिसकी अब तक मरम्मत नहीं कराई गई है। ऐसे में ग्रामीण न सिर्फ इसमें मवेशी बांध रहे हैं। बल्कि परिसर में गांव की महिलाओं द्वारा गोबर का कंडा पाथने के साथ ही सचिवालय में रखा जा रहा है। ग्राम रमनगरा के मजरा पकड़िया गांव में बना ग्राम सचिवालय तबेला बना दिया गया है। जहां उपले पाथने का काम हो रहा है। परिसर में बना शौचालय व हैंडपंप निष्प्रयोज्य है। इसमें लगे दरवाजे व खिड़कियां टूट चुकी है। इतना ही नहीं बाउंड्रीवाल पर लगा मेन गेट भी नदारद है।
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सुजानडीह में बने सचिवालय कुछ समय पूर्व मरमत की गई थी। जो अब बदहाल है। जहां बच्चे व आवारा जानवर चहल कदमी करते देखे जा रहे हैं। लॉकडाउन के दौरान मंगाई गई दो जरीकेन अभी भी यहां रखी है। जिसमें रखा सैनिटाइजर बर्बाद हो रहा है। बैजनाथपुर के ग्राम सचिवालय के प्रधान कक्ष, सचिव कक्ष, सभा कक्ष में ताला लगा हुआ है। परिसर में चौपहिया वाहन खड़ा रहता है। ग्रामीणों की माने तो इस पर बदला चौकी पुलिस ने कब्जा कर रखा है।
...तो सुविधाओं से लैस होते ग्राम सचिवालय
जिले में तैनात रहे पूर्व जिलाधिकारी नितीश कुमार द्वारा ग्राम सचिवालयों को पुस्तकालय बनाने की पहल की गई थी। जहां उनके द्वारा ग्राम प्रधानों से टाइल्स लगवाने के साथ वहां सूचना विभाग की किताबों सहित खेती किसानी से संबंधित पुस्तकें व कहानियां आदि की किताबें रखवाई गई थी।
यहां ग्राम लेखपाल, ग्राम पंचायत अधिकारी व ग्राम विकास अधिकारी सहित सफाई कर्मियों की क्रम वार ड्यूटी भी लगाई गई थी। डीएम के स्थानांतरण के साथ ही योजना भी अधर में लटक गई। लोगों का मानना है कि डीएम की योजना परवान चढ़ती तो निश्चित ही ग्राम सचिवालय सुविधा संपन्न होते।
किन ग्राम सचिवालयों में पुस्तकालय बनाया गया, वहां भेजी गई पुस्तकें आदि कहा हैं, इसकी जांच कराई जाएगी। सभी ग्राम सचिवालयों की जांच कराकर यदि अधूरा है तो उसे पूरा करा उसका उपयोग शुरू कराया जाएगा।
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- योगानंद पांडे, अपर जिलाधिकारी
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