श्रावस्ती। बाल विवाह कानून की नजर में न सिर्फ अपराध है, बल्कि इससे बेटियों पर शारीरिक व मानसिक अत्याचार भी होता है। कम उम्र में विवाह करने से जहां बेटियां जल्दी मां बन कर विभिन्न गंभीर बीमारियों से ग्रसित हो अपनी जीवन लीला समाप्त कर लेती हैं, वहीं पैदा होने वाला बच्चा भी कमजोर व रोग ग्रस्त हो सकता है। ऐसे में प्रत्येक माता पिता की यह नैतिक जिम्मेदारी है कि वह अपनी बेटी व बेटों का विवाह सही उम्र आने पर ही करें।
यह बातें शनिवार को कलेक्ट्रेट परिसर में एक संस्था की ओर से निकाले गए बाल विवाह विरोधी रथ को हरी झंडी दिखाते हुए जिलाधिकारी टीके शिबु ने कहीं। उन्होंने कहा कि यदि जिले में कहीं कोई भी व्यक्ति अपनी बेटी अथवा बेटे का बाल विवाह कर रहा हो तो चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 पर इसकी सूचना दें। इसकी जानकारी स्थानीय पुलिस अथवा जिला प्रशासन को दें। ताकि ऐसा करने वालों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई की जा सके।
सूचना देने वाले का नाम व पता गोपनीय रखने के साथ ही सही सूचना देने वाले को पुरस्कृत भी किया जाएगा। संस्था के निदेशक डॉ. जितेंद्र चतुर्वेदी ने कहा कि चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की एक परियोजना है। जो 24 घण्टे आपातकालीन निशुल्क सेवा है।
जिसके तहत बाल विवाह विरोधी रथ जिले के तीन ब्लॉक सिरसिया, जमुनहा व गिलौला के चयनित 10-10 ग्राम सभाओं का भ्रमण कर थानों में इसका समापन किया जायेगा। बाल विवाह एक कुप्रथा है। जिसके बारे में ग्रामीणों को जागरूक किया जायेगा। इस दौरान जिला कार्यक्रम अधिकारी आशा सिंह, अस्मिता सरकार, शारदा देवी, रेखा वर्मा, पकंज श्रीवास्तव, रामकिशोर, मनोज कुमार, श्रीपाल, ओमकार, देवी प्रसाद, पवन वर्मा व मनीष यादव आदि मौजूद रहे।