श्रावस्ती। तराई वाले इस जिले के पानी में आर्सेनिक की मात्रा बहुत अधिक पाई जा रही है। इसके सेवन से हर पांचवां व्यक्ति पेट से संबंधित रोगों से परेशान है। चिकित्सकों का कहना है कि दूषित पानी पेट व लीवर संबंधित बीमारियों के साथ कैंसर का भी कारण बन सकता है। जिले में सरकारी हैंडपंप भी स्वच्छ पानी नहीं दे पा रहे हैं। गांव में लगे अधिकतर हैंडपंप खराब है, इससे लोग कुएं व निजी हैंडपंपों का पानी पी रहे हैं।
जल ही जीवन है यह लाइन श्रावस्ती वासियों के लिए सही नहीं है। जिले में प्रतिमाह कई लोग पानी के कारण डायरिया सहित अन्य संक्रामक बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। गांवों में बीमारी का कारण अधिकांश ग्रामीणों की ओर से निजी हैंडपंपों का पानी पीना बताया जा रहा है। वहीं ग्रामीण इलाकों में लगे अधिकांश सरकारी हैंडपंप काफी दिनों से खराब पड़े है। इससे लोगों को निजी हैंडपंप और कुओं का पानी पीना पड़ रहा है।
निजी हैंडपंप का आर्सेनिक एवं अन्य मिनरल युक्त पानी पीने से लोगों को पेट के साथ लीवर सहित अन्य बीमारियां हो रही हैं। यदि चिकित्सालयों में आए हुए मरीजों के आंकड़ों पर गौर किया जाए तो जिले में हर पांचवां व्यक्ति पेट रोग से पीड़ित है।
दूषित पानी पीने से होते यह रोग
संयुक्त जिला चिकित्सालय के चिकित्सक डॉ. एनएन पांडेय का कहना है कि सल्फर युक्त पानी पीना शरीर में कुष्ठ रोग को बढ़ाता है। वहीं आर्सेनिक शरीर को कमजोर तो करता ही है साथ रोग प्रतिरोधक क्षमता को घटाता है। पीने वाले जल में फ्लोराइड बढ़ने से फ्लोरीसिस होता है और हड्डियां गलने लगती है। दूषित पानी से पीलिया, कुष्ठ, किडनी, लीवर, आंत्र शोध, डायरिया, फाइलेरिया, घेंघा इत्यादि रोगों का खतरा उत्पन्न रहता है।
ग्रामीणों को शुद्धता व पानी के प्रयोग के बारे में समय समय पर बताया जाता है। लोगों को चाहिए कि वह निजी व कम गहराई वाले हैंडपंपों का पानी पीने से परहेज करें। - डॉ. एपी भार्गव, मुख्य चिकित्सा अधिकारी