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शिक्षा स्वास्थ्य और सुरक्षा, मांग रहा है बच्चा बच्चा

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श्रावस्ती के एस टी मोसेस इं‌गिलश स्कूल में आयोजित अपराजिता कार्यक्रम के दौरान मौजूद लोग। - फोटो : SRAWASTI
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श्रावस्ती। बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य व सुरक्षा प्रत्येक नागरिक का अधिकार है। इससे कोई भी बालक अथवा बालिका किसी कीमत पर अछूता नहीं रह सकता है। आज बच्चा-बच्चा उचित शिक्षा, स्वास्थ्य व सुरक्षा मांग रहा है। जिसमें किसी भी प्रकार का भेदभाव करने वाले सामाजिक व कानूनी रूप से अपराधी हैं। क्योंकि बेटे व बेटियां दोनों समान हैं। दोनों ही एक दूसरे के पूरक हैं। इनमें से यदि एक का भी संतुलन बिगड़ा तो उस समाज को इसके घातक परिणाम भुगतने होंगे। ऐसा कोई भी काम नहीं है। जो सिर्फ बेटे कर सकें, बेटियां नहीं।
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घर के चूल्हा चौका से लेकर सीमा सुरक्षा तक हर क्षेत्र में बेटियां अपने कौशल दिखला रही हैं। ऐसे में हमें भी एक अच्छा माता-पिता, अभिभावक व शिक्षक बन कर दोनों को समान लाड प्यार, शिक्षा व सम्मान देना होगा। यह बातें गिलौला के एसटी मोसेस इंग्लिश स्कूल में अमर उजाला के अपराजिता 100 मिलयिंस स्माइल के तहत संवाद कार्यक्रम में मुख्य अतिथि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गिलौला के अधीक्षक डॉ. रोहित कुमार ने कही। कार्यक्रम का संचालन विद्यालय के प्रधानाचार्य अनिल कुमार ने किया।
गिलैला सीएचसी अधीक्षक डॉ. रोहित कुमार ने बताया कि किशोरावस्था में प्रवेश के दौरान बेटे व बेटियों में शरीरिक व मानसिक दोनों प्रकार के परिवर्तन होते हैं। ऐसे समय में उन्हें उचित देखभाल व सलाह की जरूरत होती है। ऐसे में माता-पिता को चाहिए कि वह उनकी समस्याओं व शंकाओं का समाधान करें। आवश्यकता पड़ने पर डॉक्टर व शिक्षक की सलाह भी लेते रहे। ताकि किशोर व किशोरियाें के मन में किसी प्रकार का भटकाव न रहे।
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प्राचार्य अनिल कुुुमार ने कहा कि बच्चों को चाहिए कि वह सूर्योदय से पूर्व बिस्तर त्याग दें। नियमित समय सारिणी के अनुसार पठन पाठन करनें के साथ ही खेलकूद व व्यायाम को भी समय दें। अपने खान पान व दैनिक दिनचर्या का पूरा ख्याल रखें। क्योंकि बिना स्वस्थ रहे शिक्षा व आत्मरक्षा संभव नहीं है। इसलिए शिक्षा के साथ ही बेहतर स्वास्थ्य पर भी ध्यान दें। लोगों को चाहिए कि वह अमर उजाला के अपराजिता एटदिरेट अमर उजाला डाट काम से जुड़ कर इस मुहिम को आगे बढ़ाने में सहयोगी बनें।
छात्रा नंदनी पाठक ने कहा कि विद्यालय से मिली शिक्षा का घर पर अभ्यास जरूरी है। साथ ही समय से सोना, जगना, खाना व खेलना भी आवश्यक है। ऐसे में पढ़ाई, खेल आदि की समय सारिणी बना कर उसी के अनुसार अपनी दिनचर्या तय करें। वहीं छात्रा अनुष्का ने बताया कि घर से विद्यालय आते समय हमें कई प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए उनसे निपटने के लिए हमें सदैव तत्पर रहना होगा। इसक लिए हमारा स्वस्थ रहना भी जरूरी है। जिस पर ध्यान देना चाहिए।
छात्रा मंजरी ने कहा कि विद्यालय में हमें शिक्षा के साथ ही बेहतर स्वास्थ्य व सुरक्षा की भी जानकारी मिलनी चाहिए। इसके लिए समय समय पर विद्यालय में स्वास्थ्य कैंप व आत्मरक्षा के लिए पूर्वाभ्यास कराया जाए। ताकि हम हर क्षेत्र में अपनी उचित देखभाल कर सकें।
छात्रा प्रिया त्रिपाठी ने बताया कि सभी माता पिता व गुरुजन चाहतें हैं कि उनके बच्चे हर क्षेत्र में कामयाब हों। इसलिए बेटियों को भी बेटों के समान सभी क्षेत्रों में समान अवसर मिले। ताकि बेटियां भी बेटों से कम नहीं हैं। यह वह प्रमाणित कर सकें। वहीं छात्रा प्रज्ञा सिंह ने कहा कि अक्सर सभी घरों में यह सुनने को मिलता है कि बेटियां पराया धन हैं। ऐसा सोचना पूरी तरह से गलत है। बेटा हो या बेटी वह आपकी ही संतान हैं। ऐसे में बेटियों के मन में यह भेदभाव न भर कर उन्हें आत्म निर्भर बनाने का प्रयास करें। फिर बेटियां पराई नहीं रहेंगी।
छात्रा प्रिया पटेल ने कहा कि शिक्षा के साथ ही व्यवहारिक ज्ञान भी आवश्यक है। इसलिए माता पिता व गुरुजनों को समय समय पर बच्चों के साथ खुलेमन से बात करनी चाहिए। बच्चों से मित्रवत व्यवहार करें ताकि वह अपनी सभी समस्याएं खुल कर बता सकें।
वहीं छात्रा ऋचा ने बताया कि बहुत से माता पिता या तो स्वयं आपस में झगड़ते रहते हैं। या फिर वह अपना गुस्सा बच्चों पर निकालते हैं। जिससे बच्चों के कोमल हृदय पर इसका विपरीत असर पड़ता है। घर में खुशनुमा माहौल रखें। ताकि बच्चे भी उसी के अनुसार ढल सकें।
छात्रा दिशा सिंहन ने कहा कि बच्चों पर हर वक्त पढ़ाई का दबाव न बनाएं। उन्हें सहपाठियों के साथ खेलने कूदने का भी अवसर प्रदान करें। साथ साथ उन्हें यातायात नियम व संकेत के साथ ही अन्य जानकारी भी देते रहें। जिससे उन्हें घर से बाहर निकलने में परेशान न होना पड़े। वहीं छात्रा अराधना ने कहा किविद्यालय में एक क्लास आत्मरक्षा का भी चलना चाहिए। जिसमें बच्चों को जूडो कराटे आदि भी सिखाया जाए। ताकि आवश्यकता पड़ने पर बच्चे अपना बचाव करने के साथ ही सामने वाले को सबक भी सिखा सके।
राशि शुक्ला ने अपने विचार रखते हुए कहा कि आज अमर उजाला के इस कार्यक्रम में हमें बहुत कुछ सीखने का मौका मिला। जिसे हम अपने परिजनों व दोस्तो से भी साझा करेंगे। जिससे औरों को भी इसका फायदा मिले। और बेटियों को इसका लाभ मिल सके। वहीं गरिमा ने कहा कि अमर उजाला सिर्फ समाचार पत्र नहीं है। बल्कि अमर उजाला बेटियों को सम्मान दिलाने के लिए समय समय पर कई कार्यक्रम आयोजित करता है। हम इसके नियमित पाठक हैं। अमर उजाला को धन्यवाद जो हमें इससे जुड़ने का मौका मिला।
कोमल पाठक ने बताया कि सभी प्रकार के धन की चोरी हो सकती है। लेकिन शिक्षा वह अनमोल रतन है जिसे कोई न तो छीन सकता है और न चुरा सकता है। इसे जितना बांटों यह बढ़ती है। मेरी सभी को सलाह है कि वह मन लगा कर पठन पाठन करें। वहीं छात्रा प्रतिभा ने बताया कि आज इस कार्यक्रम में हमें शिक्षा व स्वास्थ्य से संबंधित कई सीख मिली। हम टाइम टेबिल बना कर सभी कार्य करेंगे। मेरी दोस्तों को सलाह है कि वह भी समय सारिणी बना कर उसी के अनुसार अपनी दिनचर्या तय करें।
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