श्रावस्ती। सड़कों पर घूम रहे छुट्टा गोवंश को एक स्थान पर रखने के लिए जिले में मनरेगा के तहत 23 पशु आश्रय स्थल का निर्माण कराया गया था। इसके साथ ही इकौना के टंडवा महंथ में एक करोड़ बीस लाख रुपये से गो संरक्षण केंद्र बनाया गया था। सिरसिया में एक निजी क्षेत्र की गोशाला को भी अनुदान दिया गया।
यह पैसा इसलिए खर्च किया गया कि छुट्टा घूम रही गायों को आसरा मिल सके। इसके विपरीत वर्तमान में जिले के पशु आश्रय स्थल व गो संरक्षण केंद्र बदहाल हैं। यहां सभी केंद्रों पर मवेशियों के लिए पर्याप्त मात्रा में चारा ही नहीं है।
सभी गोशालाओं में मवेशी बीमार है। औसतन प्रतिदिन किसी न किसी मवेशी की मौत भी हो रही है। कहीं-कहीं तो गौवंश की सेवा करने वाले सेवक ही तैनात नहीं है। गोशालाओं की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। अधिकारियों से शिकायत के बाद भी समस्याओं का हल नहीं किया जा रहा है।
गोशाला- रानीसीर का मजरा चिरैया
गौशाला की क्षमता लगभग एक हजार पशु की है। मौजूदा समय में मात्र 35 गाय ही मौजूद है। इस गोशाला में दो गाय व एक बछड़ा गंभीर रूप से बीमार है। मौजूद वर्कर रमेश वर्मा ने बताया कि एक सप्ताह में 15 गाय व बछड़े की मौत हो चुकी है। एक बछड़ा शनिवार को मर गया था, जिसे दफना दिया गया है। उसका टोकन डॉक्टर लेकर चले गए हैं। भूसा है, हरा चारा तो लगा है, लेकिन मशीन न होने के कारण चारा काटकर नहीं दिया जाता है।
गोशाला - अकबरपुर
इस गोशाला की क्षमता 250 गायों की है। मौके पर पांच सौ गाय मिलीं। गौशाला में गायों की सेवा के लिए 30 कर्मचारियों की आवश्यकता है, जबकि मौके पर 6 लोगों की तैनाती मिली। गोशाला में तैनात कर्मचारी कुलदीप ने बताया कि छह गाय अत्यधिक बीमार है। प्रतिदिन औसतन पांच से छह गायों की मौत गोशाला में हो रही है। गोशाला की गायों के लिए पर्याप्त टीन शेड भी नहीं है। इससे जानवर बारिश में भीगते है।
गोशाला- गोंड़ारी
इस गौशाला की क्षमता 250 गायों की है। मौके पर 70 गायें मिलीं। चारे के नाम पर सड़ा भूसा था। वह भी समाप्त होने वाला है। कुछ गोवंश टीन शेड के नीचे तो कुछ खुले आसमान के नीचे धूप में हांफतीं दिखीं। गौशाला में पांच गौवंश मरणासन्न स्थिति में नजर आए। पूरी गोशाला में गंदगी व अव्यवस्था देखी गई। जानवरों की यहां नियमित जांच भी नहीं होती है। सूचना पर कभी कभी ही पशु चिकित्सक आ पाते है।
गोशाला - शिवबालक गोस्वामी
इस गोशाला के रजिस्टर में 501 गाय दर्ज है, लेकिन मौके पर मात्र 350 गाय ही देखी गई। आठ गोवंश बीमार है। कई गोवंश उठ बैठ भी नहीं सकते। इनके सामने चारा भी नहीं देखा गया। गोशाला में जलभराव है। इससे दुर्गंध भी उठ रही थी। यहां कार्य कर रहे मजदूरों ने ही बताया की प्रतिदिन औसतन पांच से छह गोवंश की मौत होती है। जिसका टैग पशु चिकित्सक ले जाते है।
गोशाला - वर्गावर्गी, नगर पालिका भिनगा
इस गोशाला की क्षमता लगभग 250 गायों की है। इसके बाद भी यहां गोशाला खाली नजर आई। यहां न तो कर्मचारी ही दिखे, और न ही पशुओं के लिए चारा ही। गोशाला के बाहर कई गोवंश टहल रहे थे। यहीं स्थिति भिनगा नगर की भी देखी गई। जहां आवारा पशुओं की संख्या पर्याप्त थी। इस गोशाला के निर्माण की लागत लगभग दो करोड़ रुपये थी।
सुधर रही गोशालाओं की स्थिति
गोशालाओं की स्थिति पहले से कुछ बेहतर हो रही है। लगभग सभी जगह चारे की व्यवस्था हो गई है। कुछ जानवर बीमार है। उनके इलाज के लिए सीवीओ को निर्देश दिया गया है। यहां तक की सभी पशु चिकित्साधिकारी को अपने अपने क्षेत्र में आने वाले पशुओं की नियमित जांच कराने का आदेश भी दिया गया है। इसके बाद भी कमी है तो उसे देखा जाएगा। - अवनीश राय सीडीओ