तपोस्थली स्थित आनंद बोधित पर प्रार्थना करते अनुयायी।
कटरा (श्रावस्ती)। वियतनाम से 40 अनुयायियों का दल शुक्रवार को बुद्ध की तपोस्थली श्रावस्ती पहुंचा। इस दौरान दल के सदस्यों ने भिक्षु देवानंद के नेतृत्व में आनंद बोधि पर विश्व शांति की कामना की। साथ ही तपोस्थली का भ्रमण कर बुद्धम शरणम गच्छामि का उद्घोष किया।
पूजन के बाद प्रार्थना सभा में बौद्ध भिक्षु देवानंद ने कहा कि जब ध्यान की वीणा पर संगीत उठता है, जब मौन मुखर होता है, तब शास्त्र निर्मित होते हैं। इनको हमने शास्त्र कहा है। वह ऐसे लोगों की वाणी है, जो वाणी के पार चले गए थे। कोई वाणी के पार चला जाए तो उसकी वाणी शास्त्र हो जाती है। इससे वेदों का पुनर्जन्म होने लगता है। पहले तो मौन को साधो, मौन में उतरो, फिर जल्दी ही वह घड़ी भी आएगी, जहां तुम्हारे शून्य से वाणी उठेगी। तब उसमें प्रामाणिकता होगी, सत्य होगा। पूजन के बाद उपासकों ने तपोस्थली की विभिन्न स्मारकों का भ्रमण कर उसकी ऐतिहासिक जानकारी प्राप्त की। इस मौके काफी संख्या में बौद्ध भिक्षु मौजूद रहे।