राजर्षि काली मंदिर में पूजा करते श्रद्धालु
श्रावस्ती। चैत्र नवरात्र के चौथे दिन रविवार को मां कूष्मांडा की आराधना की गई। मंदिरों में घंटे-घरियाल की धुन सुबह से ही सुनाई देने लगी। दर्शन पूजन के लिए श्रद्धालु विभिन्न देवी मंदिरों में पहुंचे।
पंडित राधेश्याम पांडेय ने बताया कि मां कूष्मांडा ने ही ब्रह्मांड को अंधकार से प्रकाश में बदला। उन्होंने ही सृष्टि की रचना की है। माता की आराधना करने से उत्तम स्वास्थ, ऊर्जा व यश की प्राप्ति होती है। सिंह वाहिनी माता शीघ्र ही अपने निष्कपट भक्तों पर प्रशन्न हो जाती हैं। आठ भुजाओं वाली माता कूष्मांडा सूर्य मंडल में निवास करती हैं और सूर्य को ऊर्जा प्रदान करती हैं, जिससे जीवन संभव है। राजर्षि काली मंदिर में सुबह छह बजे से ही भक्तों का तांता लग रहा है। इसी तरह से इकौना के बेंचूबाबा, जमुनहा के जगतपति धाम मंदिर, शिवगढ़ कलां के श्रीराम जानकी मंदिर व भंगहा के काली मंदिर में भक्तों की भीड़ उमड़ रही है।