श्रावस्ती। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से सोमवार को न्यायालय परिसर भिनगा में विधिक सेवा दिवस मनाया गया। इसकी अध्यक्षता जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष व जनपद न्यायाधीश ने की। इस दौरान जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष व जनपद न्यायाधीश साकेत बिहारी दीपक ने कहा कि कानून अमीर व गरीब, छोटा व बड़ा नहीं मानता। कानून की नजर में सभी लोग एक समान हैं। सभी को सस्ता व सुगम न्याय मिले, यही न्याय की अवधारणा है।
विधिक सेवा दिवस पर उन्होंने शिविर में मौजूद लोगों को कानून की जानकारी दी। लोगों को सुलभ कानूनी न्याय के प्रति जागरूक किया। वहीं प्रभारी जिला विधिक सेवा प्राधिकरण व सिविल जज प्रवर खंड जयहिंद कुमार सिंह ने कहा कि सभी नागरिकों के लिए उचित, निष्पक्ष और न्याय प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए नौ नवंबर को राष्ट्रीय विधिक सेवा दिवस मनाया जाता है।
इसकी शुरूआत पहली बार वर्ष 1995 में भारत के सर्वोच्च न्यायालय की ओर से समाज के गरीब और कमजोर वर्गों को सहायता और समर्थन प्रदान करने के लिए की गई थी। निशुल्क विधिक सेवाऐं राष्ट्रीय स्तर पर, राज्य स्तर पर, जिला स्तर पर, तालुका, सर्वोच्च न्यायालय व उच्च न्यायालय स्तर पर की जाती है।
विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम 1987 का गठन समाज के कमजोर वर्गों को निशुल्क कानूनी सेवाएं प्रदान करने के लिए और विवादों के सौहार्दपूर्ण समाधान के लिए उद्देश्य से किया गया है। इस दौरान प्रभात सिंह सिविल जज अवर खंड, आशुतोष पाठक, राकेश कुमार, पीयूष कृष्ण मिश्रा, दयाराम, ब्रम्हवादिनी शुक्ला, अफरोज फातिमा, राकेश चैहान, उमाशंकर भार्गव, संजय, सुशील मिश्रा, शंभू यादव, दीप चंद्र सरोज आदि मौजूद रहे।