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आकार लेने लगा 24वां कृषि विज्ञान केंद्र

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श्रावस्ती। नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय का 24वां कृषि विज्ञान केंद्र श्रावस्ती में आकार लेने लगा है। विश्वविद्यालय ने यहां फिलहाल दो वैज्ञानिकों की तैनाती भी कर दी है। यह वैज्ञानिक आसपास के ग्रामीणों को मौसम व मिट्टी के अनुसार खेती करने के गुर सिखा रहे हैं। विश्वविद्यालय को सिरसिया के गब्बापुर ग्राम पंचायत में 275 बीघे जमीन दी गई है।
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कृषि के क्षेत्र में श्रावस्ती अभी निचले पायदान पर है। यहां तकनीकि खेती न के बराबर होती है। परंपरागत खेती में किसानों को उनकी उपज की लागत ही ठीक से नहीं मिल पाती है। अब जनपद में कृषि की दिशा में परिवर्तन का समय आ गया है।
सिरसिया की ग्राम पंचायत गब्बापुर में कृषि विज्ञान केंद्र धीरे धीरे अपना स्वरूप लेने लगा है। यहां विश्वविद्यालय ने दो वैज्ञानिकों की तैनाती भी कर दी है। यह वैज्ञानिक आसपास के ग्रामीणों को खेती किसानी के गुर सिखा रहे हैं। यह वैज्ञानिक संबंधित क्षेत्रों में जा कर किसानों को मौसम व उनके खेत की मिट्टी के आधार पर उपज तैयार करने के टिप्स दे रहे हैं।
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पांच और वैज्ञानिकों की होगी तैनात
कृषि विज्ञान केंद्र को सुचारु रूप से चलाने के लिए वैज्ञानिकों के सात व अन्य स्टाफ के लिए नौ पद सृजित किए गए हैं। इसमें से दो वैज्ञानिकों की तैनाती हो चुकी है। जो कैंप कार्यालय बना कर किसानों को जागरूक कर रहे हैं। अभी पांच और वैज्ञानिकों की तैनाती की जानी है।
मिलेगी मौसम व मिट्टी की जानकारी
किसानों को मौसम का पूर्वानुमान बताने के लिए यहां मौसम वेदशाला स्थापित होगी। इसके साथ ही मिट्टी की जांच के लिए भी कई तरह की लैब बनाई जाएंगी। जहां किसान जाकर अपनी मिट्टी की जांच कभी भी करा सकते हैं। इसके साथ ही यहां के वैज्ञानिक किसानों को मौसम की जानकारी देते रहेंगे।
यहां होगा शोध कार्य
आचार्य नरेंद्र देव कृषि विश्वविद्यालय में शिक्षा, शोध व प्रसार पर काम होता है। श्रावस्ती में विश्वविद्यालय की ओर से बनाए जा रहे 24वें कृषि विज्ञान केंद्र में शोध परक कार्य किए जाएंगे। यहां किसानों को पारंपरिक खेती के उन्नत बीज तैयार करने के तरीके बताए जाएंगे। इसके साथ ही फल व सब्जियों की खेती पर भी विशेष काम होगा।
आएगा परिवर्तन
जिले में अभी कृषि की स्थिति सामान्य है। यहां लोग परंपरागत तरीके से खेती करते हैं। यही नहीं जिस बीज का प्रयोग यहां होता है, उसमें से अधिकांशता परंपरागत तरीके से लिया जाता है। एनडी कृषि विश्वविद्यालय के पास जलवायु के अनुसार अलग अलग फसल के लिए बीज है। जैसे कि कम पानी वाले स्थान के लिए धान के बीज अलग तो ज्यादा पानी वाले क्षेत्र के लिए अलग। इससे किसानों को नुकसान नहीं होता है। ऐसे ही जलवायु के अनुसार शाक भाजी व अन्य फलदार पौधों की स्थिति रहती है। इसके लिए वैज्ञानिक किसानों की मदद करेंगे। - डॉ. विनय कुमार, कृषि वैज्ञानिक
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