श्रावस्ती। जमुनहा मल्हीपुर मार्ग सहित क्षेत्र के गांवों को बाढ़ की त्रासदी व कटान से बचाने के लिए बरसात से पूर्व मार्ग किनारे 25 जियो ट्यूब लगवाई गई थी। जो एक बाढ़ भी न झेल सकी। विगत दिनों राप्ती के उफान पर आने के बाद शुरू हुई कटान में 22 जियो ट्यूब कट कर नदी की धारा में विलीन हो गई। इस पर तत्काल ध्यान न दिया गया तो मल्हीपुर-भंगहा मार्ग के अस्तित्व पर संकट उत्पन्न हो सकता है।
जिले की जीवनदायिनी राप्ती नदी रास्ता बदलने के लिए जानी जाती है। जिसके द्वारा प्रति वर्ष एक नया रास्ता बनाने का प्रयास किया जाता है। राप्ती नदी के कटान को रोकने के लिए बाढ़ खंड की ओर से बरसात पूर्व करोड़ों रुपये खर्च कर मल्हीपुर भंगहा मार्ग के किनारे 25 जिओ ट्यूब लगाई थी। विगत दिनों राप्ती नदी में आई बाढ़ के बाद शुरू हुई कटान में नदी की लहरों ने मुख्य मार्ग को बचाने के लिए 25 में से 22 जियो ट्यूब को काट कर अपनी धारा में विलीन कर लिया। देखा जाए तो एक जियो ट्यूब की लंबाई 20 मीटर व चौड़ाई करीब दस मीटर थी।
इतना ही नहीं मार्ग किनारे बनाई गई पंखी भी कई मीटर कट चुकी है। वहीं जमुनहा के सर्रा गांव के पास पानी के तेज बहाव के कारण मार्ग की पटरी कई मीटर कट गई। जबकि मल्हीपुर क्षेत्र के भुड़कुलवा स्थित बीरबल कुटी के पास मार्ग आवागमन बाधित है। नदी की इन कटान की जानकारी के बाद भी विभाग की ओर से अब तक मरम्मत कार्य प्रारंभ नहीं कराया गया। जिसके चलते मल्हीपुर-भंगहा मार्ग के अस्तित्व पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। जबकि देखा जाए तो मरम्मत के नाम पर भी लाखों रुपये खर्च किया जा चुका है।