तुलसीपुर। कागजों पर भले ही विकास का पहिया तेज गति से चल रहा है, लेकिन धरातल पर सच्चाई कुछ और ही है। इसका अंदाजा जिले में सड़कों की दुर्दशा को देखकर आसानी से लगाया जा सकता है। फिर चाहे वह नासिरगंज-सेमरहनिया मार्ग हो या फिर राप्ती बैराज-भिनगा मार्ग। नौ वर्ष पूर्व कटी सड़क को न तो आज तक जोड़ा जा सका है और न ही सड़क की मरम्मत हो सकी है। ऐसे में 20 से अधिक गांव के लोगों को जान जोखिम में डालकर नहर की पटरी से होकर सफर तय करना पड़ रहा है।
पांच जगहों पर कटी सड़क, आवागमन प्रभावित
जमुनहा क्षेत्र की यह सड़क बाढ़ में पांच स्थानों पर कट गई थी। पोंदली, लक्ष्मनपुर, पोंदिला, सेमरहनिया, जोगिया, सुखरामपुरवा, जमशेदपुर, धोबिहा, बाबूपुरवा और संगमपुरवा समेत करीब 20 गांवों के लोगों को परेशानी हो रही है। बारिश के दिनों में नाले की पटरी पर पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है। कीचड़ और फिसलन के बीच ग्रामीणों को जान जोखिम में डालकर आवागमन करना पड़ता है।
एंबुलेंस तक नहीं पहुंच सकी, बाइक से ले गए प्रसव पीड़िता
सड़क की बदहाली का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पिछले सप्ताह पोंदिला गांव तक एंबुलेंस नहीं पहुंच सकी। ऐसे में परिजनों को प्रसव पीड़िता को बाइक से एंबुलेंस तक पहुंचाना पड़ा। हालांकि, महिला एंबुलेंस तक पहुंच पाती, इससे पहले ही उसका प्रसव हो गया। सड़क की मरम्मत नहीं होने से ग्रामीणों को आपात स्थिति में भी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
शिकायतों के बाद भी नहीं हुआ समाधान
पोंदिला गांव निवासी जगन्नाथ यादव ने बताया कि सड़क की मरम्मत के लिए कई बार उच्चाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से शिकायत की गई, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। उनके मुताबिक, अब तक कोई अधिकारी या जनप्रतिनिधि सड़क की स्थिति देखने नहीं पहुंचा। वहीं, छोटेलाल ने बताया कि सड़क कटने के बाद से ग्रामीण भकला नाले की पटरी से आवागमन कर रहे हैं। बारिश में कीचड़ और फिसलन के कारण रास्ता और कठिन हो जाता है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि जिम्मेदार अधिकारी सड़क की मरम्मत कराकर आवागमन सुचारु कराने की पहल करेंगे।
बाढ़ में कटा नासिरगंज-सेमरहनिया मार्ग।