श्रावस्ती। जिला चिकित्सालय चिकित्सकों की कमी से खुद बीमार पड़ा है। अस्पताल में 31 चिकित्सकों के सापेक्ष मात्र सोलह चिकित्सक मरीजों का इलाज कर रहे हैं।
सीएचसी पीएचसी की स्थिति भी ठीक नहीं है। इसमें से कुछ चिकित्सक आए दिन अनुपस्थिति पाए जा रहे हैं। इसके चलते जिले से मरीजों के रेफर होने का सिलसिला नहीं रुक रहा है।
संयुक्त जिला चिकित्सालय में सौ बेड है। जिला चिकित्सालय पर जिले के बारह लाख लोगों के इलाज का जिम्मा है। इसके लिए केवल संयुक्त जिला चिकित्सालयों में 31 चिकित्सकों की तैनाती की स्वीकृति शासन से है।
चिकित्सालय के संचालन को लगभग पांच वर्ष बीत चुके हैं, इसके बाद भी आज तक इस चिकित्सालय में मानक के अनुसार चिकित्सकों की तैनाती नहीं हुई है।
आज भी यहां तय 31 चिकित्सकों के सापेक्ष 16 की ही तैनाती है। 15 पद रिक्त हैं। रिक्त पदों में लगभग सभी पद विशेषज्ञों के हैं। यही स्थिति जिले की सीएचसी व पीएचसी की भी है।
यहां पर भी तय मानक के अनुसार चिकित्सकों की तैनाती नहीं है। इससे रिक्तियों के अतिरिक्त चिकित्सकों के अस्पताल से गायब रहने की प्रवृत्ति भी मरीजों पर भारी पड़ रही है।
सीएमओ कई ओर से दिसंबर में किए गए पांच निरीक्षण में छह चिकित्सक अनुपस्थिति पाए गए थे। यही स्थिति अन्य माह की भी रही। चिकित्सक व विशेषज्ञों की कमी व उनके गायब होने की प्रवृत्ति मरीजों पर भारी पड़ रही है। मरीज छोटी दुर्घटनाओं में भी गैर जनपद के लिए रेफर किए जा रहे हैं।
कहीं एक तो कहीं दो चिकित्सकों के सहारे अस्पताल
जिले में छह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र व बारह अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों का संचालन किया जा रहा है। जहां आने वाले मरीजों को बेहतर सुविधा देने के लिए चिकित्सकों के साठ पद सृजित किए गए हैं।
इसके सापेक्ष जिले में मात्र 28 चिकित्सकों की ही तैनाती है। इसमें से एक सीएमओ, एक एसीएमओ, एक डीपीओ, एक जिला प्रतिरक्षा अधिकारी व दो डिप्टी सीएमओ की तैनाती है।
शेष बचे 22 चिकित्सकों में से औसतन प्रतिदिन तीन से चार चिकित्सक अवकाश पर रहते हैं। ऐसे में एक चिकित्सक के सहारे ही सीएचसी अथवा पीएचसी का संचालन कराया जा रहा है। यहां आने वाले मरीजों को बेहतर इलाज के लिए गैर जिलों में रेफर कर दिया जाता है।
मानव संसाधन बढ़ाने के लिए शासन को कई बार पत्र लिखा गया। इसके बाद भी चिकित्सकों की तैनाती नहीं हुई। उल्टे कुछ चिकित्सकों ने गैर जनपद के लिए अपना स्थानांतरण करा लिया। जिन्हें रिलीवर के अभाव में मुक्त नहीं किया जा रहा है। - दीपक मीणा, डीएम
जिले में चिकित्सकों की कमी के लिए बार बार शासन को पत्र भेजा जा रहा है। शासन से कुछ चिकित्सकों की तैनाती की गई, लेकिन वह नहीं आए। इसकी सूचना भी निदेशालय को भेजी जा चुकी है। जो भी होना होगा शासन स्तर पर होगा। - डॉ. बीके सिंह सीएमओ