लक्ष्मननगर (श्रावस्ती)। चीनी मिल की ओर से पेराई तो शुरू कर दी गई, लेकिन किसानों को गन्ना खरीद की पर्ची समय से नहीं भेजी जा रही है। इससे अब किसान पर्ची के लिए भटक रहे हैं।
वहीं केंद्र पर गन्ना उठान के लिए आने वाले ट्रक भी खड़े देखे जा रहे हैं। चीनी मिलों की कार्य प्रणाली किसानों के लिए परेशानी का सबब बन गई है।
एक तरफ जहां चिलवरिया चीनी मिल की ओर से बहराइच के किसानों को पर्चियां भेजी जा रही हैं, वहीं श्रावस्ती के किसानों की उपेक्षा हो रही है।
जिले के कुछ किसानों को ही गन्ना खरीद की पर्ची दी जा रही है। ऐसे में गन्ना काट कर सरसों व गेहूं की बोआई करने का सपना संजोए किसानों के अरमानों में पानी फिर चुका है।
समय से पर्ची न मिलने के कारण किसान अगेती किस्म के गन्ने की बोआई से भी वंचित हो रहे हैं। पर्ची के लिए किसान गन्ना तौल केंद्र से लेकर चीनी मिलों तक चक्कर लगा रहे हैं।
ऐसा ही कुछ लक्ष्मननगर में स्थापित गन्ना क्रय केंद्र पर भी देखने को मिला। जहां कई ट्रक गन्ना उठाने के लिए खड़े थे, लेकिन किसान नदारद थे। बीच बीच में कुछ किसान आकर अपनी उपज की तौल करा रहे थे।
यहां मौजूद कचनापुर निवासी किसान ओम प्रकाश ने बताया कि उन्हें विगत वर्ष बेचे गए गन्ना का भुगतान अब तक नहीं हो सका है।
कसियापुर निवासी तीरथ राम व नहर सिंह, नारायनपुर निवासी दयाराम व सेवक ने बताया कि समय से गन्ना तौल न होने व पर्ची न मिलने के कारण आगे की फसल की बोआई नहीं हो पाई है।
अब अगेती प्रजाति का गन्ना भी नहीं हो सकेगा। ऐसा ही कहना कई अन्य किसानों का भी है। जो मिल की कार्य प्रणाली से आहत दिखे।
इस संबंध में अपर जिलाधिकारी योगानंद पांडेय ने बताया कि गन्ना अधिकारी को तलब कर समस्या दूर करने के लिए निर्देश्ाित किया जाएगा।
जिससे किसानों को कोई असुविधा न होने पाए। वहीं जोनल इंचार्ज उमेश सिंह का कहना है कि पर्ची कम आने से किसानों को गन्ना बेचने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। किसानों को ज्यादा से ज्यादा गन्ना पर्ची मिल सके इसका प्रयास किया जायेगा।