श्रावस्ती। ग्रीष्म ऋतु आने के साथ ही आग लगने की घटनाओं का सिलसिला शुरू हो गया है। इसे रोकने के लिए अग्निशमन विभाग के पास संसाधनों का टोटा बना हुआ है। जिले में कहीं भी आग लगने की घटना होने पर राहत के लिए लोगों को खुद उपाय करने होंगे, अन्यथा धन व जन हानि उठानी पड़ सकती है।
तीन तहसील, पांच ब्लॉक व छह थाना क्षेत्रों वाले इस जिले में 397 ग्राम पंचायत व 538 राजस्व ग्राम के साथ ही भिनगा व इकौना नगर भी शामिल है। जिले में लगभग साढ़े बारह लाख आबादी निवास करती है। इनको आग लगने की घटनाओं से बचाने के लिए अग्निशमन विभाग के पास तीन बड़े व एक छोटा वाहन ही मौजूद है। राप्ती द्वारा जिले को दो भागों में बांटे जाने के कारण एक वाहन को नदी पार इकौना में रखा गया है।
इससे इकौना व गिलौला क्षेत्र में आग लगने लगने पर राहत पहुंचाई जाती है। वहीं दो बड़े व एक छोटे वाहन के सहारे जंगल पार सिरसिया व राप्ती पार जमुनहा सहित हरिहरपुररानी विकास क्षेत्र में राहत कार्य किया जाता है। ऐसे में कम संसाधनों के कारण जब तक अग्निशमन वाहन मौके तक पहुंचता है, तब तक देर हो जाती है।
अब जब खेत खलिहान में काम शुरू हो रहा है, तो आग लगने की घटनाओं को रोकने के लिए जिलेवासियों को जागरूक होना होगा। इसके लिए अग्निशमन विभाग ने एक एडवाइजरी जारी की है। इसमें मौसम को देखते अग्नि से बचाव के उपाय बताए गए हैं। इसके साथ आम लोगों से अपील भी की गई है कि वह इन उपायों का पालन करें।
बरतें यह एहतियात
1- नगरीय क्षेत्र में लोग बिस्तर पर लेट कर बीड़ी, सिगरेट का प्रयोग न करें। बच्चों को माचिस व ज्वलनशील पदार्थ न दें, भोजन बनाने के पश्चात गैस सिलेंडर, स्टोप, लालटेन, मोमबत्ती, चिराग व अंगीठी बुझा कर सुरक्षित कर दें। बिजली के कटे तारों की मरम्मत करा दें, सही ढंग का फ्यूज लगाएं और एक ही प्लग पर कई यंत्र न लगाएं। सोने से पूर्व गैस सिलेंडर का रेग्युलेटर बंद कर दे। घरों में अग्निशमन यंत्र या पानी के अन्य स्रोत की जानकारी रखें।
2- ग्रामीण क्षेत्र के लोग हुक्का व बीड़ी पीने के बाद पूरी तरह बुझा कर ही फेंके। खलिहान तालाब या पानी के संसाधनों के निकट ही बनाए। खलिहान के चारों ओर पानी भरे घड़े व मिट्टी के ढेर रखें, खलिहान से खाना कम से कम सौ फीट की दूरी पर बनाएं। खलिहान विद्युत तारों से सौ फिट दूर बनाएं। चिराग बुझाने के बाद सोने के लिए जाए, रसोई घर की छत टीन से बनाएं, यदि फूस की ही बनाए तो अंदर की ओर से मिट्टी का लेप लगाए।
3- मांगलिक आयोजनों में पंडाल के निर्माण में सिंथेटिक और ज्वलनशील सामग्री का प्रयोग न करें, पंडाल को दीवार या बाउंड्री से सटाकर न बनाए, न ही इसमें रसोई बनाए। बिजली के जोड़ों को खुला न छोड़ें। विद्युत वायरिंग पंडाल में सटा कर न करें और न ही इसे हाइलोजन लाइट, धूम्रपान व आतिश बाजी ही करें।
- वीरेंद्र कश्यप प्रभारी अग्निशमन अधिकारी