शहर के अस्पतालों में ग्लूकोज की कमी हो गई है। इससे मरीज परेशान हैं और उन्हें बाहर से ग्लूकोज की बोतलें खरीदनी पड़ रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि ग्लूकोज का रेट कांट्रेक्ट नहीं होने से दिक्कतें आ रही हैं। अस्पतालों के प्रभारी रोगी कल्याण समिति से ग्लूकोज खरीद कर काम चला रहे हैं।
बलरामपुर अस्पताल के ओल्ड वार्ड में भर्ती सतीश के तीमारदार हरिपाल को 50 रुपये में बाहर से तीन ग्लूकोज की बोतलें खरीद कर लानी पड़ीं। अस्पताल में हर रोज सात सौ से अधिक ग्लूकोज की बोतलें लगती हैं, जबकि श्यामा प्रसाद मुखर्जी अस्पताल में हर दिन छह सौ ग्लूकोज की बोतलों की जरूरत है।
यहां जनरल सर्जरी में भर्ती अलीम की पत्नी शबनम और राममनोहर लोहिया अस्पताल के सर्जरी वार्ड में भर्ती अनुनय के पिता विनय ने भी मेडिकल स्टोर से ग्लूकोज खरीदने की जानकारी दी। जिले के सभी अस्पतालों का यही हाल है। स्वास्थ्य विभाग की इस लापरवाही का फायदा अस्पतालों के बाहर खुले मेडिकल स्टोर्स के संचालक उठा रहे हैं और मनमाने रेट में मरीजों को ग्लूकोज बेच रहे हैं।
दवाओं का कांट्रेक्ट हुआ, ग्लूकोज का लटका
इस साल 122 दवाओं का रेट कांट्रेक्ट हो गया है, लेकिन मरीजों के लिए सबसे महत्वपूर्ण ग्लूकोज का रेट कांट्रेक्ट नहीं हो सका है। दो महीने से अस्पताल के अधिकारी रोगी कल्याण समिति से ग्लूकोज खरीद कर काम चला रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि एक कंपनी के आने से कांट्रेक्ट नहीं हो सका।