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शशांक शेखर: पायलट से लेकर कैबिनेट सचिव तक

Thu, 13 Jun 2013 01:10 AM IST
लखनऊ/ब्यूरो
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उत्तरप्रदेश में जब विश्वनाथ प्रताप सिंह मुख्यमंत्री थे, उस समय शशांक शेखर एक विमान चालक के रूप में उनसे जुड़े।
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कहा जाता है कि विश्वनाथ प्रताप सिंह उनसे इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने कई वरिष्ठ राजनेताओं से उनकी तारीफ की।

एक अधिकारी के तौर पर शशांक के करियर की शुरुआत हुई 1985 के बाद, जब यूपी में बीर बहादुर सिंह की सरकार में वह ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी (ओएसडी) बनाए गए।  

गैर आईएएस संवर्ग के शशांक शेखर सिंह वीर बहादुर सिंह के मुख्यमंत्रित्व काल से ही सत्ता के करीब रहे।

इसके बाद चाहे कल्याण सिंह की सरकार रही हो, मुलायम की या फिर राजनाथ सिंह की, शशांक शेखर हमेशा अहम पदों पर रहे।

मायावती के मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने सबसे ऊंची छलांग लगाई।

उन्होंने अपनी प्रशासनिक क्षमता से यह साबित कर दिया कि उन्हें केवल जहाज उड़ाने में ही महारथ हासिल नहीं है बल्कि सरकार के पायलट की भी भूमिका निभाने की क्षमता है।    
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शशांक पूरे पांच साल तक मायावती के साथ छाया बन कर रहे और सरकार के अधिकतर फैसलों में उनकी अहम भूमिका रही।

एनेक्सी के पंचम तल पर मायावती के अलावा अगर किसी अफसर की चलती थी तो वह थे शशांक शेखर।

शशांक कहने को कैबिनेट सचिव थे लेकिन असलियत में वह सरकार और बसपा के एक ऐसे मजबूत स्तंभ बन गए थे कि 2010 में जब उनका कार्यकाल समाप्त हो गया तो मायावती ने उन्हें दो साल का एक्सटेंशन दे दिया।
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मामले को अदालत तक खींचने की आईएएस लॉबी की कोशिश न पहले काम आई थी और न उस वक्त कुछ हो सका जब उन्हें सेवा विस्तार दिया गया।

2012 में सरकार के आखिरी दिनों में शशांक शेखर ने खुद ही कैबिनेट सचिव का पद छोड़ दिया।
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