शामली। सरकार द्वारा गन्ना मूल्य नहीं बढ़ाने से किसान गुस्से में हैं और आंदोलन की तैयारी में जुट गया है। इसके अलावा सपा-भाकियू और रालोद ने गन्ना मूल्य के मुद्दे पर सरकार को घेरेगी।
वर्ष 2019-20 के नए गन्ना पेराई सत्र के लिए उम्मीद लगाया बैठा था। सरकार गन्ना मूल्य में जरूर बढ़ोतरी करके किसानों को राहत देने का काम करेगी। किसान संगठन 400 रुपये से लेकर 450 रुपये तक गन्ना मूल्य घोषित किए जाने की मांग कर रहे थे। सरकार द्वारा गन्ना मूल्य न बढ़ाकर किसान की कमर तोड़ने का काम किया है। गन्ना मूल्य न बढ़ने से किसान आक्रोशित है। भाकियू 11 दिसंबर को प्रदेश व्यापारी चक्का जाम करने की घोषणा की है। सपा भी किसानों की सलाह में शीघ्र आंदोलन करेगी। सपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. सुधरी पंवार ने कहा कि प्रदेश सरकार ने गन्ने के एसएपी में लगातार दूसरे साल कोई बढ़ोतरी नहीं की है, जबकि डीजल, कीटनाशक, रासायनिक खाद, मजदूरी में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। गन्ना शोध केंद्र शाहजहांपुर और लखनऊ के अनुसार इस साल गन्ने की लागत मूल्य 304 रुपये प्रति क्विंटल है, जबकि गत वर्ष यह 292 प्रति क्विंटल थी, यदि सरकारी मूल्यों को ही सही मान लिया जाए तब भी इस वर्ष 12 रुपये क्विंटल की बढ़ोतरी होनी चाहिए थी। भाजपा मिल मालिकों के इशारों पर काम कर रही है। समाजवादी पार्टी इस अन्याय के विरुद्ध किसानों से सलाह-मशविरा कर आंदोलन की घोषणा करेगी। उधर, भाकियू भानु गुट के राष्ट्रीय महासचिव अनिल मलिक ने कहा कि पिछले तीन साल से गन्ना समर्थन मूल्य न बढ़ाकर सरकार ने किसानों को बदहाल बनाने का काम किया है। उत्तर प्रदेश में बिजली के रेट अन्य प्रदेशों के मुकाबले अधिक हैं। उर्वरकों के बोरे के रेट बढ़े हैं। सरकार चीनी मिलों को मोटा पैकेज दे रही है, जबकि किसानों का बकाया गन्ना भुगतान व पिछला 3 वर्ष का ब्याज भी नहीं दिलवा पा रही है।
गन्ना मूल्य न बढ़ने से किसान ठगा गया
सरकार द्वारा गन्ना मूल्य न बढ़ाने से किसान नाराज है। पिछले तीन सालो मेें गन्ना मूल्य एक भी रुपया नहीं बढ़ा है, जबकि बीज खाद, दवाई, बिजली के दामों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। गन्ना मूल्य न बढ़ने से किसान ठगा महसूस कर रहे हैं। - किसान अक्षय बधेव।
गन्ना मूल्य के मुद्दे पर भाकियू का 21 दिसंबर को धरना प्रदर्शन
फसलों के दाम सरकार नहीं बढ़ा रही है, कैसे किसानों की आय दुगनी होगी। केंद्र और प्रदेश की भाजपा सरकार किसान विरोधी है। 11 दिसंबर को को भाकियू का प्रदेश व्यापी चक्का जाम किया जाएगा। 21 दिसंबर को भाकियू प्रदेश के जिला मुख्यालय पर गन्ना मूल्य और गन्ना उत्पीड़न के विरोध में धरना प्रदर्शन करेगी। - कपिल खाटियान, जिलाध्यक्ष भाकियू शामली।
किसान की कमर तोड़ने का काम किया
सरकार को गन्ना मूल्य नहीं बढ़ाना था, तो पहले ही गन्ना मूल्य घोषित कर दिया जाता। गन्ना मूल्य घोषित होने की इंतजार में चीनी मिलों द्वारा गन्ना भुगतान रोका जा रहा था। किसान गन्ना मूल्य बढ़ने की किसान उम्मीद लगाए बैठ थे। सरकार नए सत्र में गन्ना मूल्य बढ़ाएगी। गन्ना मूल्य न बढ़ाकर सरकार ने किसान की कमर तोड़ने का काम किया है। जल्दी ही रालोद गन्ना मूल्य पर आंदोलन चलाएगी। - डॉक्टर योगेंद्र चेयरमैन, जिला अध्यक्ष रालोद।
गन्ना मूल्य में वृद्धि न करके किसानों के साथ किया है धोखा
सरकार ने गन्ने का मूल्य नहीं बढ़ा कर किसानों के साथ धोखा किया है। प्रदेश सरकार की आंखों तले खाद, बीज, डीजल व बिजली के दामों में वृद्धि हुई है। इस महंगाई को देखते हुए ही किसान संगठनों द्वारा 400 रुपये प्रति क्विंटल गन्ना मूल्य की मांग की गई थी। आज गन्ना किसान अपने आप को ठगा सा महसूस कर रहा है। नाहिद हसन, विधायक कैराना
यूपी का गन्ना मूल्य
- अगेती प्रजाति 325 रुपये क्विंटल।
- सामान्य प्रजाति 315 रुपये क्विंटल।
- रिजेक्ट प्रजाति 310 रुपये क्विंटल।
हरियाणा राज्य में गन्ना मूल्य
गन्ना मूल्य 340 रुपये क्विंटल।
उत्तराखंड राज्य में गन्ना मूल्य
- अगेती प्रजाति 326 रुपये प्रति क्विंटल।
- सामान्य प्रजाति 316 रुपये प्रति क्ंिवटल