कैराना/झिंझाना। हथिनीकुंड बैराज से छोड़े गए पानी ने यमुना का जलस्तर बढ़ गया। मंगलवार को जलस्तर 232 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान से आधा मीटर ऊपर था। बुधवार सुबह पानी घटकर 231.60 मीटर पर आया, लेकिन यह अभी भी खतरे के निशान से 10 सेंटीमीटर ऊपर बना हुआ है।
लगातार बढ़ते जलस्तर से कैराना, झिंझाना, बिडौली, मवी, मामौर, रामड़ा समेत कई गांवों के लोग परेशान हैं। नदी का पानी खेतों में घुसने से हजारों बीघा धान, उड़द, ज्वार आदि की फसल चाैपट हो गई है।
हैदरपुर के किसान मदन ने बताया कि उनकी 12 बीघा धान और सब्जियों की फसल पानी में डूब गई, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान हुआ है।
मवी निवासी राजपाल ने कहा कि 32 बीघा फसल पानी में डूब गई है। बेटी की शादी करनी थी, लेकिन अब खर्च उठाना मुश्किल हो गया है।
रामड़ा निवासी शौकत और नितिन ने बताया कि उनकी 8 से 10 बीघा धान और गोभी की फसल पूरी तरह से नष्ट हो गई है।
झिंझाना क्षेत्र के किसानों का भी हाल बुरा है।
यहां चंदा की दस बीघा ज्वार और उड़द, रामकिशन की बैंगन और मिर्च, नरसिंह की दस बीघा गोभी और मिर्च, महमूद की दस बीघा उड़द और लौकी, मेहताब की बारह बीघा लौकी और अफजाल शेख की पंद्रह बीघा फसल बर्बाद हो गई है। इसी तरह इरफान, करता सिंह, यूनुस, सलीम और यूसुफ आदि किसानों की फसल पूरी तरह पानी की भेंट चढ़ गई।
-2013 की यादें हुईं ताजा
स्थानीय लोग मौजूदा हालात देखकर 2013 की भयावह बाढ़ को याद कर सिहर उठे हैं। उस समय हथिनीकुंड बैराज से 8 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया था, जिससे यमुना ने क्षेत्र में भारी तबाही मचाई थी। तटबंध टूटने से मवी, मामौर और सहपत गांवों में सैकड़ों मकान गिर गए थे। वहीं सैकड़ों पशु बह गए थे और एक माह तक कैराना–पानीपत मार्ग बंद रहा था।
किसानों ने की मुआवजे की मांग
पूर्व प्रधान व क्षेत्र पंचायत सदस्य अच्छू मियां ने कहा कि बाढ़ से किसानों की आर्थिक स्थिति चरमरा गई है। जिला प्रशासन को तुरंत सर्वे कराकर नुकसान का आकलन करना चाहिए और पारदर्शी तरीके से मुआवजा देना चाहिए। किसानों का कहना है कि अगर उन्हें समय पर राहत नहीं मिली तो परिवार का गुजारा चलाना मुश्किल हो जाएगा।