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क्या प्रदूषण मुक्त हो पाएंगी यमुना, कृष्णा

Wed, 22 Mar 2017 12:03 AM IST
शामली, अमर उजाला ब्यूरो
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problem - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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शामली।  उत्तराखंड के नैनीताल हाईकोर्ट ने गंगा और यमुना को जीवित व्यक्ति का दर्जा देते हुए नदियों की जमीन से अवैध कब्जे हटवाने का आदेश दिया,  तो शामली जिले में यमुना नदी और कृष्णा नदी के अस्तित्व को लेकर भी सवाल पैदा हो गया है। यमुना नदी से अवैध रेत खनन हो रहा है, तो कृष्णा नदी प्रदूषण के कारण मृतप्राय हो चुकी है। कृष्णा नदी की जमीन पर बड़े पैमाने पर अवैध कब्जे भी हो गए हैं। 
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प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद जिस तरह से कड़े फैसले होने की उम्मीद की जा रही है, उसमें यमुना नदी से अवैध रेत खनन पर प्रभावी अंकुश लगने की संभावना भी जताई जा रही है। यमुना नदी से अवैध रेत खनन के संबंध में सीबीआई जांच चल रही है। बावजूद इसके कैराना, झिंझाना और कांधला क्षेत्र में अवैध रेत खनन चल रहा है। 

आलम यह है कि पानीपत रोड पर यमुना पुल पार स्थित यूपी सीमा से अवैध खनन करके रेत निकाला जा रहा है। रात के अंधेरे में रेत से लदे वाहनों की कतारें हाईवे पर दौड़ती हैं। नैनीताल हाईकोर्ट के आदेश के बाद उम्मीद जगी है कि अब अवैध रेत खनन पर प्रभावी अंकुश लग सकता है। 
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वहीं, सहारनपुर जिले से निकली कृष्णा नदी शामली जिले से होकर बागपत जिले के बरनावा क्षेत्र में हिंडन नदी में जाकर मिलती है। थानाभवन क्षेत्र के गांव चंदेनामाल, दभेड़ी और अन्य गांवों के लोग बताते हैं कि एक समय में कृष्णा नदी काफी चोड़ी थी और इसका पानी भी निर्मल था, जिसका उपयोग पीने में भी कर लिया जाता था। अब आलम यह है कि कृष्णा नदी मृत प्राय हो चुकी है। 

अधिकांश स्थानों पर नदी की जमीन पर अवैध कब्जे हो गए हैं, तो प्रदूषण के कारण यह जहरीली हो चुकी है। उसके आसपास के गांवों में हैंडपंपों से भी जहरीला पानी निकलता है। इस पर एनजीटी ने भी आदेश जारी किया था और कृष्णा नदी किनारे वाले गांवों में प्रदूषित पानी देने वाले हैंडपंप उखाड़ने का आदेश दिया था। 

जलालाबाद और थानाभवन क्षेत्र में कुछ हैंडपंप उखाड़े भी गए, लेकिन काफी संख्या में हैंडपंप अभी भी लगे हैं। सवाल यह है कि             क्या कृष्णा नदी को स्वच्छ बनाने के लिए भी प्रशासन कोई प्रभावी कदम उठा पाएगा।

काला हो रहा यमुना का जल 
कैराना। आस्था का प्रतीक यमुना नदी में लोग पूजन करने आते हैं, मगर यमुना नदी का हाल देखकर लोगों का दिल दहल उठता है। इन दिनों यमुना नदी का पानी काला हो गया है। कैराना क्षेत्र में पानीपत रोड पर यमुना पुल के पास पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को यमुना के प्रदूषित पानी की वजह से परेशानी हो रही हैं। वहीं, प्रदूषण को बढ़ावा देने में लोगों की भूमिका भी कुछ कम नहीं है। प्रसाद चढ़ाकर पॉलीथिन और अन्य सामान यमुना नदी में ही फेंक दिया जाता है। नदी किनारे कचरे का ढेर लगा रहता है।

हरसंभव प्रयास किए जाएंगे ः सुरेश राणा
 थानाभवन से भाजपा विधायक एवं राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) सुरेश राणा का कहना है कि कृष्णा नदी को प्रदूषण मुक्त कराने के लिए हर संभव प्रयास कराया जाएगा। कृष्णा नदी किनारे वाले गांवों में शुद्ध पेयजल आपूर्ति के लिए पूर्व में कई बार बात उठाई जा चुकी हैं। गांवों में पेयजल आपूर्ति के लिए ओवरहेड टैंक (टंकियां) बनवाए जाएंगे। कृष्णा नदी में पानी की उपलब्धता बढ़ाने पर भी काम कराया जाएगा। वहीं, प्रभारी जिलाधिकारी/सीडीओ यशु रुस्तगी का कहना है कि यमुना नदी से अवैध खनन नहीं होने दिया जाएगा। यमुना नदी में काला पानी आने की उन्हें जानकारी नहीं है। यदि ऐसा हो रहा है, तो उसे चेक कराया जाएगा। वहीं,    कृष्णा नदी के लिए एनजीटी के आदेश पर पेयजल योजना स्वीकृत हो चुकी    है, जिस पर कार्य चल रहा है।
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