शामली। घर से दूर दूसरे राज्य में जाकर परिवार को दो वक्त की रोटी के लिए काम करने वाले प्रवासी श्रमिक काम धंधा बंद होने पर अपने घर पर तो पहुंच गए है, लेकिन परेशानियों ने उनका यहां भी पीछा नहीं छोड़ा है। घर वापसी के बाद अब उन्हें काम नहीं मिल रहा है। काम की तलाश में रोज इधर-उधर जाते है, लेकिन कहीं पर मजदूरी नहीं लग रही है। हालात ये है काम न मिलने पर यह सोचकर परेशान है कि बच्चों का गुजारा कैसे होगा। घर लौटने वाले प्रवासी श्रमिकों से बातचीत कर उनका हाल जाना।
काम मिल नहीं रहा, पता नहीं कैसे होगा गुजारा
गांव टिटौली निवासी विपिन कश्यप ने बताया कि वह छत्तीसगढ़ में क्रेशर में मजदूरी करता था। लॉकडाउन में क्रेशर बंद हो गया। ट्रेन चलने पर 14 मई को घर पहुंचे थे। वहां पर जैसे तैसे कर चार-पांच हजार रुपये कमाकर घर भेजे थे। बाकी उनके पास जो बचे थे, वह लॉकडाउन में खाने में खर्च हो गए। घर पर आए हुए एक माह हो गया। यहां भी काम नहीं मिल रहा है। पत्नी और दो बच्चे हैं। घर का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा है। पत्नी थोड़ी बहुत सिलाई कर लेती है। आज सुबह चिनाई के लिए मजदूरी पर जाना था, लेकिन सुबह उसकी भी मना हो गई। काम की तलाश में रहता हूं। पता नहीं कैसे बच्चों का गुजारा चलेगा।
बिना काम क्या खाएंगे बच्चे
टिटौली निवासी प्रवीण ने बताया कि वह पंजाब के नया शहर में ईंट भट्ठे पर अपनी पत्नी के साथ काम करने गया था। लॉकडाउन में काम बंद हो गया, लेकिन बसें न चलने के कारण वहां फंसे हुए थे। कुछ दिन पहले बसें चली तो वह पहले पंजाब से हरियाणा बार्डर पहुंचे। हरियाणा बॉर्डर से जैसे तैसे कर यूपी के बार्डर पर पहुंचे और वहां से चलकर शामली आए थे। वहां पर ईंट पथाई कर 300-300 रुपये की मजदूरी पड़ रही थी। सोचा था कि घर जाकर काम धंधा मिल जाएगा, लेकिन अभी तक घर पर ही खाली है।
समझ नहीं आता बच्चों का पेट कैसे भरें
टिटौली के सुलेमान ने बताया कि पंजाब के मानसा में ठेली लगाकर फल बेचने का काम कर रहे थे। 400 के करीब दिहाड़ी पड़ रही थी। कई महीने तक काम किया। घर का खर्च चलाने को वहां से पैसे भेज देता था। लॉकडाउन होने पर वहां काम बंद हो गया। जैसे तैसे कर करीब एक महीना पहले घर आया था, तब से खाली है। घर में पत्नी और छह बच्चे हैं। कोई काम नहीं मिल रहा है, काम की तलाश में रहते है। समझ नहीं आता कि कैसे बच्चों का पेट भरें। काम नहीं मिला तो परेशानी हो जाएगी।
काम की तलाश में रोज घर बाहर निकलता हूं
गांव टिटौली निवासी नौशाद ने बताया कि वह मध्यप्रदेश के इंदौर में एक फैक्टरी में लोहे का काम करने गया था। सोचा था कि वहां मजदूरी कर परिवार का पालन पोषण करेंगे, लेकिन वहां कुछ ही दिन हुए थे कि लॉकडाउन हो गया। इसके बाद ट्रक में बैठकर तो कहीं पैदल चलकर जैसे तैसे मुसीबत झेलकर घर पहुंचा। पत्नी और छह बच्चे हैं, अब यहां आने पर भी काम नहीं मिल रहा है। काम की तलाश में रोज घर से जाता हूं, पर कहीं काम नहीं मिलता।
शामली क्षेत्र के गांव की टिटौली में अपने परिवार के साथ सुलेमान।- फोटो : SHAMLI
शामली क्षेत्र के गांव टिटौली में अपने बच्चों के साथ नौशाद।- फोटो : SHAMLI
शामली क्षेत्र के गांव टिटौली में अपनी पत्नी के साथ परवीन।- फोटो : SHAMLI