शामली। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बिजली के तार चोरी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह के खुलासे के बाद अब पुलिस की जांच में सामने आया कि बिजलीकर्मियों की मिलीभगत से तार चोरी हो रहे है।
गिरोह को नई विद्युत लाइन बिछाने और बिजली से जुड़े काम की जानकारी पहले ही मिल जाती थी। इसके बाद गिरोह उसी स्थान को निशाना बनाता था। पुलिस की जांच में ऊर्जा निगम से जुड़े लोगों की भूमिका भी सामने आई है। व्हाट्सएप के माध्यम से गिरोह के सदस्य एक दूसरे के संपर्क में रहते थे।
बाबरी पुलिस ने गिरोह के तीन सदस्यों को गिरफ्तार किया था। पूछताछ में मेरठ निवासी ऊर्जा निगम के ठेकेदार आबिद की भूमिका सामने आई थी। पुलिस के अनुसार वह गिरोह को नई विद्युत लाइन बिछने वाले स्थानों की जानकारी देता था।
पुलिस के अनुसार मामले में अब तक 11 लोगों की भूमिका सामने आ चुकी है। इनमें मेरठ, शामली और बागपत के तीन अन्य सदस्यों को पुलिस ने चिह्नित किया है। इनके गिरोह के गिरफ्तार सदस्यों से संपर्क और भूमिका की जांच की जा रही है। इसके अलावा ऊर्जा निगम से जुड़े कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि गिरोह तक विद्युत लाइनों और बिजली आपूर्ति से जुड़ी जानकारी कौन पहुंचाता था। nनई लाइन बिछने से पहले ही तय हो जाता था : एसपी नरेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि पुलिस ने गिरोह के तीन अन्य सदस्यों को चिह्नित किया है। इनके संबंध मेरठ, शामली और बागपत से बताए जा रहे हैं।
पुलिस उनके गिरोह के गिरफ्तार सदस्यों और ऊर्जा निगम से जुड़े लोगों से संपर्क की जानकारी जुटा रही है। जांच में जिन लोगों की भूमिका सामने आएगी, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। nहरियाणा और दिल्ली तक फैला है नेटवर्क : गिरोह का नेटवर्क शामली और मेरठ तक सीमित नहीं है। पुलिस पूछताछ में हरियाणा के पानीपत और दिल्ली में भी वारदात करने की बात सामने आई है।
चोरी किए गए तार दिल्ली के कबाड़ी को बेचने की जानकारी भी पुलिस को मिली है। ऐसे में पुलिस अब गिरोह के पूरे नेटवर्क और चोरी के माल को खपाने वालों की कड़ियां जोड़ रही है।