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Shamli News: जहां 20 साल तक रहा इम्दादुल्ला का वर्चस्व, वहां अब नई लहर

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गांव गढ़ी अब्दुल्ला खां का मुख्यद्वार । संवाद
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गढ़ी अब्दुल्ला खां में फिर गरमाई चुनावी जमीन
गढ़ी अब्दुल्ला खां गांव में चुनाव की सरगर्मी हुई तेज
संवाद न्यूज एजेंसी
गढ़ीपुख्ता। पंचायत चुनाव की सरगर्मी गांव गढ़ी अब्दुल्ला खां में चरम पर पहुंच चुकी है। यहां की राजनीतिक जमीन पर एक दौर में इम्दादुल्ला का दो दशक तक दबदबा रहा, जिन्होंने ग्राम प्रधान के रूप में गांव की बागडोर संभाली। अब एक बार फिर पंचायत चुनाव नजदीक हैं और नए चेहरे व पुराने दावेदार फिर से मैदान में उतरने को तैयार हैं।
गांव की कुल आबादी लगभग 18,000 है, जिनमें से 9,000 के करीब मतदाता हैं। सभी समुदायों के लोग गांव में आपसी भाईचारे के साथ रहते हैं। गांव के बुजुर्ग साउद खान ने बताया कि गांव में अब्दुल्ला खान, जो कि लगभग 1700 ईस्वी में बलूचिस्तान से आए थे, उनके नाम पर अब्दुल्ला खां पड़ा। आजादी के बाद पहली बार ग्राम प्रधान चुने गए लाला महावीर प्रसाद जैन, जो हाथ उठाकर चुने गए थे। इसके बाद इम्दादुल्ला ने दो बार, कुल 20 वर्षों तक ग्राम प्रधान के रूप में गांव की सेवा की।
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- जाति नहीं, विकास है मुद्दा
युवा फरहान खान कहते हैं कि गढ़ी अब्दुल्ला खां गांव में हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल है। यहां चुनाव जातिगत आधार पर नहीं, बल्कि विकास के मुद्दों पर लड़े जाते हैं।
पूर्व प्रधान आजम खान ने बताया कि उनके समय में ईमानदारी से खड़ंजा और अन्य निर्माण कार्य कराए गए थे। गांव के हर व्यक्ति से एक दिन का श्रमदान अनिवार्य होता था, जिससे कार्य सामूहिक प्रयासों से पूरे होते थे।
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वर्तमान ग्राम प्रधान इस्लाम ने बताया कि उनके कार्यकाल में गांव की टूटी सड़कों का पुनर्निर्माण, नाले, तालाब का सुंदरीकरण, गेट निर्माण, इंटरलॉकिंग, आरआरसी सेंटर और स्वच्छता अभियान जैसे कार्य प्राथमिकता से कराए गए।

अब तक के ग्राम प्रधानों की सूची:
लाला महावीर प्रसाद जैन (1951–1952)
इम्दादुल्ला (1952–1962, 1972–1982)
हाशिम अंसारी (1962–1972)
अमीर आजम (1982–1988)
प्रेम सिंह सैनी (1988–1994, 2000–2005)
मौलवी सदाकत (1994–2000)
नजमा चौधरी (2005–2010)
वंदना सैनी (2010–2015)
नाजमा खान (2015–2020)
इस्लाम (2020–वर्तमान)
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