- तैयारी के बावजूद सहकारी केंद्रों पर नहीं पहुंच रहे किसान
संवाद न्यूज एजेंसी
झिंझाना। चौसाना क्षेत्र सहित आसपास के गांवों में इन दिनों खेतों में गेहूं की कटाई और थ्रेसिंग का काम तेजी से चल रहा है। किसान और मजदूर दिन-रात फसल समेटने में जुटे हैं, लेकिन सरकारी खरीद केंद्रों यानी सहकारी समितियों की पूरी तैयारी के बावजूद अधिकतर किसान वहां फसल लेकर नहीं पहुंच रहे हैं।
क्षेत्र की प्रमुख सहकारी समिति बल्ला मजरा (चौसाना) से करीब 5,500 किसान जुड़े हुए हैं, जिनमें से लगभग 1,900 किसान नियमित रूप से लेन-देन करते हैं। इसके बावजूद इस बार अब तक सिर्फ 112 किसानों ने ही गेहूं बेचने के लिए पंजीकरण कराया है। समिति के एमडी देवेंद्र कुमार के अनुसार खरीद प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और बारदाना, तोल कांटा, गोदाम सहित सभी व्यवस्थाएं पूरी हैं, लेकिन किसान अभी समिति पर नहीं आ रहे।
पठानपुरा एफसीआई तौल कांटे पर भी अब तक 23 किसानों ने पंजीकरण कराया है और इनमें से केवल तीन किसानों ने गेहूं तोलवाया है। वहीं दथेड़ा समिति में 108 किसानों का पंजीकरण हो चुका है, लेकिन वहां भी तोलाई शुरू नहीं हो सकी है।
किसान रमेश कुमार, बाबूराम, सतीश का कहना है कि पंजीकरण के बावजूद तोलाई में देरी, बारदाना की कमी, स्टाफ की अनुपलब्धता और भंडारण की दिक्कतें उन्हें समितियों से दूर कर रही हैं। कई बार ट्रॉली लेकर लौटना पड़ता है, जिससे समय और श्रम दोनों बर्बाद होते हैं। इस समय खेतों में गन्ने की बुवाई, छिड़काव और सिंचाई जैसे जरूरी कार्य भी चल रहे हैं, ऐसे में किसान आसानी से फसल बेचने का विकल्प चुनना चाहते हैं।
किसान अरविंद राठी ने बताया कि यदि समितियों की व्यवस्थाएं सुधर जाएं तो वे यहीं अनाज बेचने को तैयार हैं, लेकिन बार-बार की असुविधा उन्हें परेशान करती है। किसान सचिन चौधरी ने कहा कि गेहूं कटाई के साथ खेतों के अन्य काम भी जरूरी होते हैं, इसलिए समय बचाना उनकी प्राथमिकता है। सरकार द्वारा की गई तैयारियों के बावजूद जब तक सहकारी समितियों की कार्यप्रणाली में सुधार नहीं होगा, तब तक किसान इनके प्रति भरोसा नहीं जता पाएंगे। यदि प्रक्रिया सरल, तेज और पारदर्शी हो तो किसान क्षेत्र की ही समितियों में अनाज बेचना पसंद करेंगे।