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क्या होगा कल भाई, नशे में डूबी जब तरुणाई

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शामली। आओ गुनगुना लें गीत समूह के तत्वावधान में नशाबंदी पर ऑनलाइन कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। कवियों ने नशे की लत को लेकर युवाओं को सावधान किया तथा देश के भविष्य के लिए नशे से दूरी बनाने का आह्वान किया।
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पानीपत की आराधना सिंह अनु ने सरस्वती वंदना से कवि सम्मेलन की शुरुआत की। डा. जय सिंह आर्य ने नशे की विस्तृत दुष्प्रवृत्ति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा, क्या होगा कल भाई, नशे में डूबी जब इस देश की तरुणाई। हरगोबिंद झांब कमल ने कहा, जीवन में नशा दो प्रकार का, एक हमको महान बनाता है, दूजा गर्त में ले जाता है। भक्ति, सेवा, देश-प्रेम का नशा, जीवन को अमर कर जाता है। केसर कमल ने कुछ यूं पढ़ा, फिर खड़ा-खड़ा क्या सोच रहा तू, छोड़ दे अब नशा, हंसते-हंसते जीना सीख तू जीवन का ले भरपूर मजा।
संचालक संजय जैन ने कहा, जवानी में नशे के कश लगाते हैं बहुत ज्यादा, बुढ़ापे में वही हमको सताते हैं बहुत ज्यादा। भारत भूषण वर्मा ने संकल्पित किया, नशे की लत लगी जिनको, उन्हें लत से छुड़ाना है, नशा यमराज का ख़त है, ये ख़त उनको पढ़ाना है। ओजस्वी कवि प्रीतम सिंह प्रीतम ने उत्प्रेरित किया, यदि इच्छा है बल पौरुष की, महका-महका हो यौवन, मेरी माने तो दमक उठेगा, झुर्री-झुर्री जर-जर तन। दारू, मदिरा, बीड़ी, गुटखा, नशा कोई भी मत करना, दूध, दही, घी का कर सेवन, उच्च विचार सरल जीवन। लखनऊ से अनुजा बाजपेयी मनु ने कहा, माना कि चाय की आदत खराब है, मगर आज चाय का ही तो रिवाज है। बस्ती से नीरज द्विवेदी ने कहा, धूम्रपान संग मयखाना जाना छोड़ प्यारे, जिंदगी जो हीर शमशीर मत बनाइए। इनके अलावा प्रेमसागर प्रेम नोएडा और श्रीकृष्ण निर्मल दिल्ली ने भी बेहतरीन कविताएं सुनाईं। अनुपिंद्र सिंह अनूप पानीपत, आकाश दिल्ली, अनिल पोपट शामली आदि श्रोता भी शामिल हुए।
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