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Shamli News: क्या खाएं, यहां तो दूध, पनीर, मावा, मिठाई में हो रही मिलावट

Mon, 02 Mar 2026 12:02 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
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शामली। होली हो या दीपावली हर त्योहार पर मिठाइयों व अन्य खाद्य पदार्थों की खपत बढ़ जाती है। मोटा मुनाफा कमाने के लिए मिलावटखोर सक्रिय होकर स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। दूध, पनीर, मावा, मिठाई, तेल सभी में मिलावट की जा रही है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग द्वारा लिए गए खाद्य पदार्थों के नमूनों की जांच रिपोर्ट में आधे से ज्यादा नमूने फेल या मानकों पर खरे नहीं उतरे हैं।
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जिले में खाद्य सुरक्षा विभाग ने एक अप्रैल 2025 से 28 फरवरी 2026 तक कुल 264 नमूने लिए हैं। इनमें से अब तक 258 नमूनों की रिपोर्ट आई है। प्राप्त जांच रिपोर्ट में 132 नमूने मानकों पर खरा नहीं उतरे हैं। इनमें 40 नमूने पूरी तरह असुरक्षित मिले हैं, जिनका सेवन करना हानिकारक होता है।
इनके अलावा 71 नमूने अधोमानक और 21 मिथ्याछाप पाए गए हैं। सबसे ज्यादा मिलावट दूध से बने उत्पादों में पाई गई है। पिछले साल दीपावली पर खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने 24 नमूने लिए थे, जिनमें 15 नमूनों की रिपोर्ट में नौ नमूने अधोमानक, तीन असुरक्षित, एक मिथ्याछाप पाए गए जबकि नौ अन्य नमूनों की रिपोर्ट अभी प्राप्त नहीं हुई है। चिकित्सकों का कहना है कि मिलावटी खाद्य पदार्थों का सेवन करना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है।
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पेट संबंधी बीमारियां व एलर्जी होने का खतरा
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. किशोर कुमार आहूजा ने बताया कि मिलावटी व नकली खाद्य पदार्थों का सेवन करने से पेट में संक्रमण होने का खतरा रहता है। इससे पेट में दर्द, मितली, उल्टी आदि हो सकती है। इसके अलावा बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता भी प्रभावित हो सकती है।
एलर्जी होने का भी खतरा रहता है। लंबे समय तक मिलावटी खाद्य पदार्थों का सेवन करने से हृदय रोग, कोलेस्ट्रॉल, लिवर व गुर्दे रोग होने का खतरा बढ़ जाता है।
nनकली पनीर बनाने की पकड़ी जा चुकी फैक्टरी : शासन के निर्देश पर होली पर 19 से 28 फरवरी तक खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा अभियान चलाया गया। इसके तहत 26 नमूने लिए गए। 21 फरवरी को कंडेला इंडस्ट्रीयल एरिया में विभाग की मंडलीय टीम ने नकली पनीर बनाने की फैक्टरी पकड़ी गई थी। मौके से करीब साढ़े तीन क्विंटल नकली पनीर, पांच हजार लीटर मिश्रित दूध, केमिकल आदि बरामद हुआ था। मौके से मटर में भी हरे रंग का केमिकल मिलाया जाना सामने आया था। टीम ने यहां से 11 नमूने लिए थे। इनके अलावा जिले में अलग-अलग स्थानों से मावा व सरसों के तेल आदि के नमूने लिए गए हैं, जिन्हें जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा गया है।
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