गांव मंगलौरा में ग्रामीणों और खनन पट्टा संचालकों के बीच वार्ता कराते पुलिस अधिकारी। संवाद
- फोटो : बहराइच के नाजिरपुरा में लगाया जा रहा बिजली ट्रांसफार्मर।
चौसाना। गांव मंगलौरा में यमुना नदी के रेत खनन पट्टे से निकलने वाले डंपरों को लेकर ग्रामीणों और खनन संचालकों के बीच विवाद हो गया। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि रेत से भरे ओवरलोड डंपर गांव के बीच से गुजर रहे हैं, जिससे रास्ते क्षतिग्रस्त हो रहे हैं और हादसों का खतरा बना रहता है। विरोध बढ़ने पर ग्रामीणों ने खनन वाहनों का रास्ता रोक दिया।
ग्रामीणों का कहना है कि खनन क्षेत्र तक पहुंचने के लिए यमुना नदी की ठोकर (बांध) को तोड़कर रास्ता बनाया गया है, जिसके माध्यम से डंपरों का आवागमन हो रहा है। इसके बावजूद कुछ वाहन गांव के भीतर से निकल रहे हैं। आरोप है कि शनिवार शाम एक डंपर गांव के बीच से निकला और मार्ग अवरुद्ध करने के लिए खड़ी की गई एक ट्रॉली को क्षतिग्रस्त कर दिया। ट्रॉली क्षतिग्रस्त होने की सूचना पर ग्रामीणों में रोष फैल गया और उन्होंने खनन से जुड़े वाहनों को गांव से न निकलने की चेतावनी दी।
सूचना पर बिड़ौली और झिंझाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने ग्रामीणों और खनन संचालकों से वार्ता कर मामले को शांत कराया। देर रात दोनों पक्षों के बीच सहमति बनी कि रेत से भरे वाहन गांव के मुख्य मार्ग से न होकर निर्धारित वैकल्पिक मार्ग से गुजरेंगे। इसके बाद खनन कार्य दोबारा शुरू हो सका। स्थिति को देखते हुए पुलिस पूरी रात क्षेत्र में निगरानी करती रही।