शामली। बेचे गए माल का जीएसटी रिफंड यानी कैपिटल उद्यमियों को एक से लेकर दो साल तक नहीं मिल पा रहा है। जिसके कारण उद्यमियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा जीएसटी अधिकारी उद्यमियों को छापे का डर दिखाकर परेशान कर रहे हैं। साइमा चेयरमैन और लघु उद्योग भारती के मंडल अध्यक्ष अंकित गोयल ने बताया कि कुछ शरारती तत्वों द्वारा जीएसटी में फर्जी रजिस्ट्रेशन कर फेक बिल काटे जा रहे हैं और वह घूमकर चौथी-पांचवी बार उद्यमियों, व्यापारियों के पास आ जाते हैं। फिर भी जीएसटी एसआईबी द्वारा उनको नहीं पकड़ा जाता।
उल्टा वे आकर उद्यमियों के प्रतिष्ठानों पर छापा मारते हैं और उनका उत्पीड़न करते हैं। इससे व्यापारियों की छवि भी धूमिल होती है। जिलाध्यक्ष आलोक जैन का कहना है कि कुछ वस्तुओं पर कच्चा माल 18 प्रतिशत और बने हुए पक्के माल पर पांच प्रतिशत टैक्स है।
विभाग में 13 प्रतिशत कैपिटल पड़ी रहती है, उसका रिफंड समय पर नहीं मिल पाता। इससे व्यापारियों की पूंजी सालों तक विभाग के पास पेंडिंग पड़ी रहती है, जबकि नियम एक सप्ताह में रिफंड देने का है।
उद्यमी वेदप्रकाश आर्य का कहना है कि रिफंड नहीं मिलने के कारण व्यापारियों को व्यापार चलाने में परेशानी हो रही है। उद्यमी रोहित गर्ग का कहना है कि जीएसटी अधिकारियों का उत्पीड़न रुकना चाहिए।
अंकित गोयल ने बताया कि जल्द ही विभिन्न समस्याओं को लेकर उद्यमियों–व्यापारियों की एडिशनल कमिश्नर ग्रेड-वन धीरेंद्र प्रताप सिंह से वार्ता होगी। बैठक में विभिन्न मुद्दों को प्रमुखता से उठाया जाएगा।