थानाध्यक्ष कर्मवीर सिंह ने पकड़े गए आरोपी उजैफा ने पूछताछ में बताया कि उसकी बहन मरियम की शादी वर्ष जनवरी 2017 में मोनू उर्फ इस्तकार निवासी गांव सिक्का के साथ हुई थी। उजैफा ने आरोप लगाया कि ससुराल वालों ने उसकी बहन पर जेठानी मारिया उर्फ मन्नत के जेवरात और कपड़े चोरी करने का आरोप लगाकर उसे छोड़ दिया था। इस मामले में उन्होंने फैसले की बात की। अधिवक्ता गुलजार और इस्तकार उनके घर पहुंचे थे, लेकिन गुलजार फैसले में बाधक बना हुआ था। इसके बाद उसने अपने भाई हमजा, बहन और उनके यहां बैंड पर लाइट का काम करने वाले शौकीन के साथ मिलकर अधिवक्ता को रास्ते से हटाने का फैसला लिया। इसके बाद शौकीन के साथी अजीम ने अपने साथी शहजाद के साथ मिलकर अधिवक्ता की हत्या की वारदात को अंजाम दिया।
इस तरह से की गई थी हत्या
थानाध्यक्ष के मुताबिक उजैफा ने बताया कि नवंबर 2018 में शौकीन और अजीम निवासी पिलखुआ चोरी की गाड़ी के साथ सहारनपुर में पकड़े गए थे। शौकीन के कहने पर उसने अजीम की जमानत कराई थी। अजीम ने उनसे कहा था इस अहसान के बदले उनसे कोई काम बताना। जेल से छूटने के बाद अजीम और शौकीन उससे मिले तो उसने अपनी बहन की समस्या बताई। इसके बाद अजीम अपने साथी शहजाद उर्फ चक्कू को साथ लेकर उनके घर पहुंचा। इसके बाद सभी ने मिलकर गुलजार को ठिकाने लगाने की योजना बनाई। उन्होंने गुलजार का फोटो, चेंबर की लोकेशन और घर जाने का रास्ता बताया। इसके बाद अजीम और शहजाद के बताए अनुसार वह और शौकीन मुंबई चले गए ताकि उन पर किसी तरह का शक न हो सके। 23 अक्तूबर को गुलजार की हत्या करने के बाद रात में करीब 10 बजे अजीम व शहजाद ने मेसेज कर उन्हें काम पूरा होने की सूचना दी। इसके बाद वह और शौकीन कई दिन पहले मुंबई से लौट आए थे।
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