शामली। पूर्व मंत्री वीरेंद्र सिंह को भाजपा ने एमएलसी तो बना दिया, लेकिन एक बार फिर से मंत्री बनने की उनकी महत्वकांक्षा पूरी नहीं हो पाई। राजनीति के जानकारों की मानें तो भाजपा ने वीरेंद्र को एमएलसी बनाकर गुर्जर समाज को साधने का प्रयास किया है। साथ ही बाबू हुकुम सिंह के गुर्जर जनाधार को एकजुट करने का प्रयास किया गया है। पार्टी के इस कदम को राजा मिहिर भोज की प्रतिमा के अनावरण के बाद उपजे विवाद को शांत करने की कोशिश भी मानी जा रही है।
प्रदेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री वीरेंद्र सिंह कांधला विधानसभा से वर्ष 1980 से पहली बार विधायक चुने गए थे। वर्ष 2003 में रालोद-सपा गठबंधन में प्रदेश सरकार में पशुपालन मंत्री के रुप में कैबिनेट मंत्री के रुप में पूर्व केंद्रीय मंत्री अजित सिंह की कृपा से बनाए गए थे। 1993 और 2007 में चुनाव हार जाने के बाद वह वर्ष 2009 में रालोद छोड़कर सपा में शामिल हो गए थे। अखिलेश सरकार बनने पर पूर्व मंत्री वीरेंद्र सिंह ने कैराना विधानसभा के उपचुनाव 2015 में सपा प्रत्याशी नाहिद हसन को जिताने में अहम योगदान दिया था। सपा सरकार ने उन्हें गन्ना बीज निगम का चेयरमैन बनाया था। बाद में सपा की ओर से वीरेंद्र सिंह को एमएलसी नामित किया था। वर्ष 2019 में लोकसभा चुनाव में अखिलेश यादव से नाराज होकर उन्होंने भाजपा का दामन थाम लिया था।
कैराना लोकसभा चुनाव में भाजपा सांसद प्रदीप चौधरी को विजयश्री दिलाने में भी उनकी अहम भूमिका रही। वीरेंद्र सिंह का एमएलसी का कार्यकाल पिछले साल खत्म हो गया था। हाल ही में हुए जिला पंचायत चुनाव में भी उन्होंने भाजपा की जीत में अहम भूमिका निभाई थी। जिसके बाद सीएम योगी ने वीरेंद्र सिंह के नाम की ढाई माह पूर्व एमएलसी के लिए संस्तुति कर दी थी। मंत्री मंडल विस्तार की चर्चाओं के बीच चार दिन पूर्व भाजपा प्रदेश संगठन महामंत्री सुनील बंसल ने उनका बायोडाटा मंगा लिया था। मंत्री मंडल विस्तार कार्यक्रम में उन्हें बुलाया गया था। जिसके बाद उनके मंत्री बनने की अटकलें सामने आने लगी, लेकिन उन्हें महज एमएलसी पद ही मिला।
भाजपा कार्यकर्ता उनके मंत्री बनने की आस लगाए बैठे थे। वीरेंद्र सिह के एमएलसी बनने के बाद उनके पैतृक गांव जसाला में जश्न का माहौल है। मुख्यमंत्री ने वीरेंद्र सिंह को एमएलसी बनाकर नई ताकत दी, वहीं गुर्जरों को भाजपा के पक्ष में करने का दांव खेला है। भाजपा के पूर्व सांसद हुकुम सिंह के बाद वीरेंद्र सिंह गुर्जर बिरादरी के एक मात्र क्षत्रप है, जो विधानसभा चुनाव में भाजपा के लिए संजीवनी देने का काम कर सकते हैं।