शामली निकाय चुनाव में जनता जनार्दन ने राजनीतिक दलों से ज्यादा चेहरों को तरजीह दी, तभी तो जिले में दस में से छह निकायों पर निर्दलीय प्रत्याशियों को जनता ने जिताया। जिले के राजनीतिक परिदृश्य पर बात करें, तो बहुजन समाज पार्टी को फायदा हुआ, जबकि सपा को भारी नुकसान। वहीं, सिर्फ एक अध्यक्ष पद जीतकर भाजपा 2012 की स्थिति को बरकरार रख पाई। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस तो अपना खाता तक नहीं खोल पाईं।
शुक्रवार को निकाय चुनाव की मतगणना संपन्न हो गई। चुनाव नतीजों में निर्दलीय प्रत्याशियों की बल्ले बल्ले रही। शामली, कैराना, झिंझाना, थानाभवन, एलम और गढ़ीपुख्ता में निर्दलीय प्रत्याशी जीते, जबकि अधिकांश राजनीतिक दलों ने यहां अपने प्रत्याशी उतारे थे। वहीं, नगर पालिका कांधला, नगर पंचायत ऊन और जलालाबाद में बसपा प्रत्याशी चुनाव जीत गए, जबकि 2012 में बसपा समर्थित कोई प्रत्याशी नहीं जीत सका था। बसपा ने इस बार ही
पार्टी सिंबल पर प्रत्याशी उतारे। हर सीट पर जातिगत समीकरण को साधते हुए बसपा ने टिकट बांटे। नगर पालिका कांधला से वाजिद हसन को ऐन वक्त पर बसपा ने प्रत्याशी घोषित कर सबको चौंका दिया था, क्योंकि नामांकन होने के दो दिन पूर्व तक वाजिद हसन सपा में थे और टिकट कटने पर वह बसपा में चले गए। बसपा ने वाजिद हसन को प्रत्याशी बनाकर कांधला में दलित-मुसलिम गठजोड़ को कामयाब बनाया। वहीं, नगर पंचायत ऊन में बसपा ने जाट बिरादरी से कुलदीप मान को प्रत्याशी बनाकर बसपा के बेस वोट के साथ जाट वोट प्लस करते हुए अपनी रणनीति बनाई। वहीं, जलालाबाद नगर पंचायत में मुसलिम प्रत्याशी उतारकर दलित-मुसलिम गठजोड़ बनाया, जिसका पार्टी को फायदा भी हुआ।
उधर, समाजवादी पार्टी 2012 के चुनाव के मुकाबले बेहद कमजोर साबित हुई। 2012 में जिले में नगर पालिका कैराना, कांधला, नगर पंचायत बनत, झिंझाना, ऊन और गढ़ीपुख्ता सपा प्रत्याशी अथवा सपा के समर्थित प्रत्याशी जीते थे, लेकिन इस बार सपा का एक भी प्रत्याशी जीत नहीं पाया। इसके अलावा भाजपा ने 2012 में शामली नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष पद पर विजयश्री प्राप्त की थी, लेकिन इस बार वह भी पार्टी के हाथ से निकल गई। हालांकि नगर पंचायत बनत में भाजपा प्रत्याशी की जीत ने भाजपा की परफार्मेंस को बरकार रखा है। वहीं, शामली नगर पालिका को छोड़कर कांग्रेस ने अन्य निकायों पर अपने प्रत्याशी तो उतारे, लेकिन कांग्रेस प्रत्याशी कोई करिश्मा नहीं कर पाए, जिस कारण कांग्रेस का खाता भी नहीं खुल सका।
मुसलिम मतदाताओं ने चली सधी चाल
मुसलिम मतदाताओं को लेकर कयास लगाए जा रहे थे कि मुसलिम समाजवादी पार्टी के साथ रहेगा या फिर बसपा के साथ। चुनावी नतीजों ने साफ कर दिया है कि मुसलिम मतदाताओं ने निकाय बदलने के साथ ही अपनी पसंद भी बदल दी। किसी एक पार्टी के नाम पर मुसलिम मतदाता एकजुट नहीं हो पाए। क्योंकि कांधला में मुसलिम मतदाताओं का रुझान बसपा प्रत्याशी वाजिद हसन की तरफ रहा, तो शामली, थानाभवन, कैराना, झिंझाना में बसपा प्रत्याशी के लिए मुसलिम मतदाता एकजुट नहीं हो पाए। कैराना में निर्दलीय प्रत्याशी हाजी अनवर हसन की जीत से साफ है कि मुसलिमों ने पार्टी नहीं देखी। वहीं, झिंझाना में निर्दलीय प्रत्याशी नौशाद, तो थानाभवन में निर्दलीय प्रत्याशी रफत परवीन को जिताने में कसर नहीं छोड़ी। राजनीतिक पंडित मान रहे हैं कि मुसलिम मतदाताओं ने पार्टी से ज्यादा अपने पसंदीदा चेहरे को तरजीह दी।
अध्यक्ष पद के विजेता और उपविजेता
नगर निकाय --- विजेता--पार्टी--मिले वोट----उपविजेता--पार्टी--मिले वोट -- कुल वोट
शामली --अंजना बंसल-- निर्दलीय--25780---दीपिका संगल--भाजपा-19274--55846
कैराना--हाजी अनवर--निर्दलीय--14615--राशिद अली--सपा--8547---------43814
कांधला--हाजी वाजिद हसन--बसपा-7257-नरेश सैनी--भाजपा-6720------22342
थानाभवन--रफत परवीन--निर्दलीय-10107--अंजली शर्मा-निर्दलीय-6771---21114
जलालाबाद--गफ्फार---बसपा--5004---जहीर मलिक-सपा-4256---------14583
झिंझाना ---नौशाद---निर्दलीय--2156---कय्यूम--निर्दलीय -2097-------10173
ऊन ---कुलदीप मान--बसपा--3318----प्रदीप चौधरी-भाजपा-3082------9252
गढ़ीपुख्ता--अलीहसन--निर्दलीय-3015---हरवीरी-निर्दलीय--2135 ---- 7175
एलम---दीपा पंवार---निर्दलीय --1952----रीना पंवार-भाजपा-1627 ----- 7377
बनत--राजीव चौधरी--भाजपा-2517----वजहात खां -निर्दलीय-2465---- 10456