शामली। मेरठ-करनाल हाईवे पर सरपट दौड़ती कार सवार लोगों को क्या मालूम था कि यह उनकी अंतिम यात्रा होगी। शनिवार की रात हुए हादसे में कार सवार तीन महिलाओं सहित चार लोगों की मौत से चीखपुकार मच गई। मौके का नजारा देख लोगों के रूह कांप उठे। कार चला रहा शुभम घायलावस्था में मेरठ के एक अस्पताल में जिंदगी और मौत से संघर्ष कर रहा है।
पंजाब के पटियाला से मेरठ के नगली साहिब तीर्थ दर्शन करने चली शुभम की मां सीमा को पता नहीं था कि वह उसकी जिंदगी की आखिरी रात होगी। कार को उसका का बेटा ही चला रहा था। कार में सीमा अपनी सहेली अंजू और रीना के साथ कार की पिछली सीट पर बैठी हुई थी।
आगे की सीट पर विश्व अग्रवाल शुभम की बराबर में बैठे हुए थे। पटियाला से चलने के बाद करनाल होते हुए कार मेरठ-करनाल हाईवे पर पहुंची। पीछे बैठी तीनों महिलाएं सो गईं। शुभम के बराबर में बैठे विश्व अग्रवाल को भी नींद आने लगी। इस बीच ट्रक चालक द्वारा अचानक ब्रेक लगाए जाने से कार चालक सकपका गया। पलक झपकते ही पीछे से आ रहे डंपर ने कार में पीछे से टक्कर मारते हुए कार को आगे वाले ट्रक में घुसा दिया।
कार में पीछे बैठी तीनों महिलाएं चंद पलों में हमेशा के लिए सो गईं। कार में आगे विश्व भी मौत का शिकार हो गए। पुलिस ने कार में मिले मोबाइल से नंबर मिलाकर हादसे की सूचना परिजनों को दी। जानकारी होते ही परिवार में कोहराम मच गया। परिवार के अन्य लोग शव लेने शामली भी पहुंच गए।
हाईवे पर वसूली के खेल में खत्म होती जिंदगियां
शामली। जिले में हो रही दुर्घटनाओं के पीछे एक कारण हाईवे पर वसूली भी है। आए दिन हाईवे पर वसूली के खेल में लोगों की अपनी जिंदगी से हाथ धोना पड़ रहा है। शनिवार रात हुए हादसे में वन विभाग के चेकपोस्ट पर वाहनों से वसूली भी कारण है।
दरअसल, मेरठ-करनाल हाईवे पर बिड़ौली यमुना पुल से लेकर शामली कोतवाली के लांक गांव के पास बने चेकपोस्ट तक रात में वाहनों को रोका जाता है। बिड़ौली यमुना पुल, अहमद गढ़ पुलिस चौकी, वन विभाग का चेकपोस्ट, टिटौली पुलिस चौकी, विजय चौक, बुढ़ाना तिराहा, फिर लांक चेकपोस्ट सहित सात जगह वाहनों को रोकने के लिए बेरिकेडिंग की जाती है।
हकीकत यह है कि रात में में वाहनों के चेकिंग के नाम पर वसूली की जाती है। शनिवार की रात करीब ढाई बजे जब शुभम की कार मेरठ-करनाल हाईवे पर काठा नदी के पास पहुंची, तो वहां पर वन विभाग का चेकपोस्ट है। यहां पर लकड़ी से भरे वाहनों तथा अन्य वाहनों से वसूूली होती है।
शनिवार रात भी वाहनों को रोका जा रहा था। ट्रक पहले से ही लाइन में थे। आगे वाले ट्रक ने रुकने के लिए ब्रेक मारे तो शुभम ने भी ब्रेक मार दिए, लेकिन पीछे आ रहे डंपर चालक के ब्रेक नहीं लगे और हादसा हो गया।
ओवरलोड वाहनों पर रोक लगाने में प्रशासन नाकाम
ओवरलोड वाहनों के कारण भी वसूली होता है। जिस डंपर के कारण हादसा हुआ है, वह डंपर भी रोड़ी से ओवरलोड था। डंपर में लोड अधिक होने के कारण उसके ब्रेक नहीं लग पाए। ओवरलोड होने के कारण डंपर कार को समेटते चला गया।
हाईवे पर रात में रोज करीब एक हजार डंपर रेत और रोड़ी, और डस्ट से भरे हुए निकलते हैं। इन वाहनों पर रोक लगाने के बजाय केवल वसूली कर चालकों को आगे भेज दिया जाता है। ओवरलोड वाहनों पर रोक लगाने में जिला और पुलिस प्रशासन नाकाम है।