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किसानों की आवाज उठाने वालों का भी भुगतान फंसा

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शामली। नियमानुसार किसानों से खरीदे गए गन्ने का 14 दिन के बाद भुगतान करने पर ब्याज देना होता है, लेकिन ये सब नियम कायदे सिर्फ कागजों तक सिमटे हैं। वर्तमान पेराई सत्र में जिले की शुगर मिल चले तीन महीने से अधिक हो चुके हैं, लेकिन भुगतान पांच फीसदी हुआ है। देरी से भुगतान का ही 6.68 करोड़ मिलों पर बकाया है, सवाल उठता है कि इसे दिलाएगा कौन। हैरानी की बात है कि किसानों की आवाज उठाने वाले गन्ना प्रतिनिधियों का भी गन्ना भुगतान फंसा है।
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वर्तमान पेराई सत्र में शामली शुगर मिलें नवंबर के महीने में शुरू हो गई थी। थानाभवन एक नवंबर, शामली पांच और ऊन मिल नौ नवंबर से शुरू हो गई थी। गन्ना विभाग से मिले 10 फरवरी तक हुई गन्ना खरीद और भुगतान के आंकड़ों के अनुसार तीनों मिलों ने अब तक कुल पांच अरब 84 करोड़ 18 लाख का गन्ना खरीदा है। इनमें से चार अरब 98 करोड़ 91 लाख रुपये कीमत का गन्ना नियमानुसार खरीद के 14 दिन पूर्व का है। मिलों ने अब तक भुगतान केवल 26 करोड़ नौ लाख रुपये का किया है। ऐसे में नियमानुुसार 14 दिन से देेरी पर तीनों शुगर मिलों पर छह करोड़ 68 लाख 39 हजार का ब्याज बैठ रहा है। भुगतान में देरी पर ये लगातार बढ़ता रहेगा। ऐसे में सवाल उठता है कि किसानों को लेट पेमेँट पर भुगतान कौन कराएगा।
शामली ने नहीं किया भुगतान
शामली शुगर मिल ने चालू पेराई सत्र में नवंबर से 10 फरवरी तक एक अरब 78 करोड़ का गन्ना खरीदा है ,लेकिन इनमें से एक रुपये का भी भुगतान अब तक नहीं दिया है। मिल पर देरी से भुगतान का ही दो करोड़ से अधिक का ब्याज बैठ रहा है।
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मिल खरीद बकाया देरी पर ब्याज
शामली 15112.60 15112.60 201.96
ऊन 13782.5 12532.44 168.04
थानाभवन 20996.81 1966636.81 298.39
-------------------------------------------------------------------------
कुल 49891.46 47281.85 668.39
कोट
नियम कायदे बहुत बनाए, पालन किसी का नहीं
इस साल का ही करीब चार लाख शामली शुगर मिल पर गन्ना मूल्य बकाया है। पहली पर्ची पर आठ नवंबर को गन्ना दिया था, जिसका आज तक भी भुगतान नहीं हुआ है। सरकार ने नियम कायदे तो बहुत बनाए हैं लेकिन इसका पालन कोई नहीं करा रहा। ब्याज तो दूर मूल भी नहीं मिल रहा। भाकियू ने एक सप्ताह का अल्टीमेटम दिया है। - चौ. सतपाल ,सहारनपुर मंडल महासचिव भाकियू
हमारा खुद का भुगतान नहीं हुआ
हम खुद 100 बीघा में गन्ना बोते हैं। हमारी सभी भाइयों का संयुक्त परिवार है। दो नवंबर को हमारी पहली पर्ची से गन्ना चला गया था, लेकिन अभी तक उसका भी भुगतान नहीं हुआ। किसान प्रतिनिधि होने के नाते हमारे पर भुगतान को किसानों का दबाव है। समिति द्वारा शुगर मिल को तीन से चार नोटिस जा चुके हैं, लेकिन मिल प्रशासन गंभीर नहीं है। मिल पर ब्याज सहित भुगतान का दबाव बना रहे हैं। - अशोक कुमार, चेयरमैन गन्ना विकास परिषद थानाभवन
कई बार अफसरों को लिखा है
विभागीय अधिकारियों को कई बार लिख चुके हैं। परिषद की बैठक में भी 14 दिन में भुगतान के लिए प्रस्ताव हो चुका है। ब्याज सहित भाुगतान किसानों को होना चाहिए। विभागीय स्तर से पूरा दबाव बनाया जा रहा है। - वीर सिंह मलिक, चेयरमैन गन्ना विकास परिषद शामली
कोट
शुगर मिलों पर भुगतान के लिए पूरा दबाव बनाया जा रहा है। नोटिस भी दिए जा रहे हैं। नियमानुसार मिलों को विलंब भुगतान पर ब्याज भी देना होता है। फिलहाल मूल भुगतान दिलाने के लिए कोशिश हो रही है। - विजय बहादुर, जिला गन्नाधिकारी, शामली
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