इस बार गंगा दशहरा पर गंदेवड़ा संगम में करें स्नान
शामली। गंदेवड़ा में स्थित गंगा-यमुना नहर के संगम को हरिद्वार की हर की पौड़ी की तर्ज विकसित किया गया है। यह पर्यटन के साथ ही धार्मिक स्थल के रूप में भी विकसित हो रहा है। कोरोना संक्रमण के कारण लगी पाबंदियों के चलते गंगा दशहरा पर हरिद्वार नहीं जाने वाले भक्त यहां आकर गंगा और यमुना से आने वाले जल में डुबकी लगाकर पुण्य लाभ कमा सकते हैं।
गंगा दशहरा हो या कार्तिक पूर्णिमा के मौके पर गंगा में स्नान करने का महत्व है। श्रद्धालु हरिद्वार, शुकतीर्थ, गढ़मुक्तेश्वर और कुरुक्षेत्र में स्नान करने के लिए जाते हैं। कोरोना संक्रमण काल के चलते इस बार भीड़ इकट्ठा होने पर पाबंदियां हैं। इस बार गंगा दशहरा 20 जून को है। उत्तराखंड जाने में पाबंदियों के चलते इस बार बहुत कम श्रद्धालु ही हरिद्वार गंगा स्नान के लिए जा पाएंगे। ऐसे भक्तों के लिए गंगा और यमुना का जल शामली जनपद के गंदेवड़ा में ही उपलब्ध है। गंगा और यमुना नहर के गंदवेड़ा संगम को हर की पौड़ी की तरह की विकसित किया गया है। 20 जून को गंगा दशहरा में जिले के श्रद्धालु स्नान के लिए गंदवेड़ा गंगा-यमुना संगम की ओर रुख कर सकते हैं।
गंगा-यमुना संगम परियोजना एक नजर में
शामली। हरिद्वार से गंगा का जल यमुना नदी में लाने के लिए गंगा-यमुना संगम परियोजना तैयार की गई थी। प्रतिदिन गंगा का 1100 क्यूसेक पानी रुड़की गंगनहर के माध्यम से एक नहर परियोजना का निर्माण कराकर गंदवेड़ा में पूर्वी यमुना नहर में भेजा जाता है। गंगा-यमुना नहरों का मिलन गंदवेड़ा में होता है। गंदवेड़ा में गंगा-यमुना संगम के सुंदरीकरण के लिए शासन से एक करोड़ 77 लाख में से 88 लाख 51 हजार रुपये की लागत से संगम स्थल पर घाट, रैलिंग बनवाए हैं। पर्यटन विभाग की ओर से 14 करोड़ रुपये की लागत से परियोजना तैयार करके शासन को भेजी गई। फिलहाल यह राशि नहीं मिली है। यहां पर स्नान के लिए घाट, चेंजिंग रूम और पूजा के लिए मंदिर आदि का निर्माण किया गया है। साथ ही यहां पर गेस्ट हाउस का भी निर्माण चल रहा है।
संगम स्थल पर प्रस्तावित निर्माण
- 20 फुट की गंगा -यमुना की प्रतिमा, मोबाइल टायलेट, पार्किंग स्थल, टिन शेड, स्नान गृह, शौचालय, 100 मीटर घाट, चबूतरा निर्माण, स्ट्रीट लाइट, ओवरब्रिज, चेजिंग रूम, यात्री विश्राम कक्ष, 30-40 फुट ऊंचा वाच टावर, 15 दुकानें आदि।