मंदिरों में होगी सजावट, पंडित करेंगे पूजा अर्चना, श्रद्धालु घरों में रहेंगे
शामली। इस बार श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का व्रत दो दिन का होगा। कोरोना लॉकडाउन के कारण जिले के श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर मंदिर खुले रहेंगे और सजावट होगी, किंतु श्रद्धालु नहीं आएंगे। वह घरों में रहकर पूजा- अर्चना करेंगे। मंदिरों में सिर्फ पंडितों द्वारा पूजा-अर्चना की जाएगी।
पंडितों के मुताबिक भाद्रपद की अष्टमी तिथि 11 अगस्त मंगलवार सुबह 9.06 बजे से लेकर 12 अगस्त की सुबह 11.15 बजे तक रहेगी। इन दोनों तिथियों में रोहिणी नक्षत्र का संयोग नहीं मिल रहा है। रोहिणी नक्षत्र 13 अगस्त को भोर से 3.26 से मिल रहा है। ज्योतिषाचार्य के अनुसार कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व अष्टमी तिथि को ही मनाया जाता है। इस वजह से पर्व 11अगस्त मंगलवार को स्मार्त यानी गृहस्थ जन्माष्टमी पर्व मना सकेंगे। वहीं, वैष्णव यानि साधु-संन्यासी, वैष्णव भक्त या वैष्णव गुरु से दीक्षा लेने वाले शिष्य 12 अगस्त को जन्माष्टमी पर्व मना सकेंगे। शहर के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित प्रभुशंकर शास्त्री ने बताया कि स्मार्त अष्टमी तिथि को ही पर्व मनाते हैं, जबकि वैष्णव उदया तिथि मानते हैं। इस वजह से दो दिन पर्व का संयोग बन रहा है। इससे दो दिनों तक पर्व की धूम रहेगी। सर्वार्थ सिद्धि योग में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनेगी। उसी दिन कृतिका नक्षत्र लगेगा, यही नहीं, चंद्रमा मेष राशि और सूर्य कर्क राशि में रहेंगे। कृतिका नक्षत्र और राशियों की इस स्थिति से वृद्धि योग बना रहा है। इस तरह बुधवार की रात के बताए गए मुहूर्त में भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करने से दोगुणा फल मिलेगा। जगन्नाथपुरी में 11 अगस्त को, तो मथुरा, द्वारिका में कृष्ण जन्माष्टमी 12 अगस्त, बुधवार को दिन पूरा देश अपने कान्हा की भक्ति में रम जाएगा। हालांकि कोरोना महामारी और लॉकडाउन के कारण इस बार की जन्माष्टमी थोड़ी फीकी जरूर रहेगी। प्रशासन की ओर से लोगों से अपील की जा रही है कि वे घरों में रहकर ही श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाएं। सामाजिक दूरी का पालन करते हुए लोग अपनी कॉलोनी, मोहल्ले, गांव के घरों में श्रीकृष्ण की पूजा अर्चना करेंगें। श्री हनुमान धाम के प्रधान सलील द्विवेदी का कहना है कि श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के दिन मंदिरों की सजावट होगी। मंदिर खुलेंगे। पंडितों की ओर पूजा अर्चना की जाएगी। श्रद्धालुओं को घरों में पूजा अर्चना करने के लिए अनुुरोध किया है।
श्रद्धालु पीतांबर परिधान धारण करें -
शामली। रात में कान्हा जी को पंजीरी का भोग लगाएं। श्रीकृष्ण जन्म की तिथि और नक्षत्र का एक साथ नहीं मिल रहे। 11 अगस्त को अष्टमी तिथि सूर्योदय के बाद लगेगी, लेकिन पूरे दिन और रात में रहेगी। भगवान श्रीकृष्ण का जन्म अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र में हुआ है।
-पंडित प्रभुशंकर शास्त्री का कहना है कि इस साल जन्माष्टमी पर्व पर श्रीकृष्ण की तिथि और जन्म नक्षत्र का संयोग नहीं बन रहा है।
- 11अगस्त में व्रत करने वालों के लिए पूजा आरती का शुभ मुहूर्त रात 11-36 बजे से 12 22 बजे तक।
-12 अगस्त में जन्माष्टमी व्रत करने वालों के लिए पूजा आरती का शुभ मुहूर्त रात 12.05 बजे से 12.46 बजे तक का रहेगा।