शामली/ कांधला। कांधला में कुत्ते के हमले के बाद रेबीज से चाय विक्रेता राजीव शर्मा की मौत हो गई थी। जिसके बाद से लोगों में दहशत है। जिले में शहरों व कस्बों में आवारा कुत्तों के झुंड लोगों पर हमला कर घायल कर रहे हैं, लेकिन नगर निकायों में कुत्तों के न पंजीकरण की व्यवस्था और न ही पकड़कर उन्हें रखने की कोई योजना है। जिले में रोजाना कुत्ते काटने से घायल 200 से अधिक मरीज अस्पतालों में पहुंच रहे हैं।
कांधला के मोहल्ला रायजादगान निवासी चाय विक्रेता राजीव शर्मा (55) को हिंसक पिटबुल नस्ल के कुत्ते ने चेहरे पर हमला कर घायल कर दिया था। एक माह चार दिन बाद हालत बिगड़ने पर दिल्ली के प्राइवेट अस्पताल में मंगलवार को उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। रेबीज के कारण उनकी मौत होना बताया गया। यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी कुत्ते काटने व रेबीज से मौत होने के मामले सामने आ चुके हैं, लेकिन आवारा कुत्तों को पकड़ने या पालतू कुत्तों के पंजीकरण की कोई व्यवस्था नगर निकायों में नहीं है। यहां तक कि पिटबुल समेत कई नस्ल के कुत्ते खतरनाक होने के बाद भी इनके पालने से रोकने की कोई योजना नहीं है।
नगर पालिका शामली के अधिशासी अधिकारी विनोद कुमार सोलंकी का कहना है कि पालतू कुत्तों के पंजीकरण कराने की व्यवस्था नहीं है। आवारा कुत्तों को लेकर शासन स्तर पर नियमावली बनाई गई है, लेकिन उसे अभी लागू नहीं किया गया है। नियमावली लागू होने पर कुत्तों को पकड़ने, रखने और उपचार आदि व्यवस्था कराई जाएगी।
- ये बोले नागरिक
मोहल्ला रामसागर निवासी मुकेश कुमार ने बताया कि मोहल्ले में आवारा कुत्तों का आतंक है। सड़क पर कुत्तों के झुंड घूमते रहते हैं। इनके पकड़ने की व्यवस्था होनी चाहिए।
चौधरी चरण सिंह काॅलोनी निवासी संदीप ने कहा कि आवारा कुत्तों के कारण सड़कों व गलियों से निकलना मुश्किल हो रहा है। दुपहिया वाहन पर भी कुत्ते पीछा करते हैं।
माजरा रोड निवासी अमित निर्वाल का कहना है कि आवारा कुत्ते सड़कों से लेकर गलियों तक में घूमते रहते हैं, जो महिलाओं व बच्चों समेत सभी लोगों पर हमला करते हैं। इस समस्या का समाधान होना चाहिए।