ऑनलाइन हलाल प्रमाणीकरण का टैग लगा मिला, 24 घंटे में डिलीवरी का दावा
ऑनलाइन साइट पर नेल पाॅलिस 900 रुपये से लेकर तीन हजार, साबुन 110 से लेकर 200, लिपिस्टिक 500 रुपये तक में बेची जा रही है। इनकी पैकिंग पर स्पष्ट लिखा है कि यह उत्पात हलाल है। इनके विवरण में भी इस बात का जिक्र किया गया है कि यह उत्पाद पूरी तरह सुरक्षित है और हलाल श्रेणी में आते हैं। पड़ताल करने पर पता चला है कि बकरी के दूध से बनी साबुन का पैकेट 400 रुपये तक में बेचा जा रहा है। इस पर हलाल का टैग भी लगा हुआ है। यह भूरा रंग देती है। लिखा गया है कि इसमें अमोनिया का प्रयोग नहीं किया गया।
वहीं, कई साबुनों पर भी हलाल का टैग लगा हुआ है, जो बकरी के दूध से बनी बताई जा रही है। इसके अलावा चावल, पास्ता की भी खूब बिक्री ऑनलाइन हो रही है। कंडिशनर के शराब मुक्त होने की बात लिखी गई है। एलोवेरा जूस, आई ड्राप भी ऑनलाइन प्लेटफार्म पर उपलब्ध है।
ऑर्डर करने पर 24 घंटे में उत्पाद पते पर पहुंचने का विवरण था। इसी तरह एलोवेरा जूस और आई ड्राप की बुकिंग करने पर एक दिन में निर्धारित था।
कई स्थानों पर की छापामारी
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की टीम ने शहर में अभियान चलाकर मॉल व दुकानों पर छापा मारकर जांच पड़ताल की। किसी भी स्थान पर हलाल प्रमाणित उत्पाद नहीं पाया गया।
जिले में ऑफलाइन नहीं बेचे जा रहे हलाल प्रमाणित उत्पाद
संवाददाता ने जिले में हलाल प्रमाणित उत्पादों को लेकर पड़ताल की। पड़ताल के दौरान शामली के अलावा कैराना, कांधला, थानाभवन, बाबरी, चौसाना में कोई भी दुकानदार हलाल प्रमाणित उत्पाद देने को तैयार नहीं हुआ। कहा कि बिक्री पूरी तरह से बंद है।
पड़ताल के दौरान रिपोर्टर और दुकानदारों के बीच बातचीत के प्रमुख अंश...
शामली का मुजफ्फरनगर रोड स्थित शोरूम
संवाददाता : हलाल प्रमाणित साबुन और चावल, पास्ता चाहिए।
दुकानदार : भाई, सरकार ने रोक लगा दी, अब बिक्री नहीं होती।
दिल्ली रोड पर दुकान
संवाददाता : भाई हलाल प्रमाणित उत्पाद चाहिए, मिलेंंगे क्या
दुकानदार : नहीं, सरकार ने रोक लगा दी है। इसलिए अब कोई भी बिक्री नहीं कर रहा है।
जानिए.. क्या है हलाल प्रमाण पत्र
मौलाना याकूब का कहना है कि ज्यादातर लोग हलाल का मतलब बकरे का गला रेतने के बाद खून निकलने पर खाने के लिए मांस तैयार करना मानते हैं। दरअसल, हलाल एक अरबी शब्द है। इसका अर्थ कानून सम्मत या जिसकी इजाजत इस्लामिक कानून से है। इसलिए कुछ कंपनियां खाद्य सुरक्षा मानक अधिनियम में इसका प्रावधान न होने के बावजूद उत्पादों को प्रमाणित करने लगी।
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हलाल प्रमाणीकरण वाले उत्पादों की तलाश में छापामारी कराई जा रही है। यदि हलाल प्रमाणीकरण वाले उत्पादों की बिक्री होती मिलती है तो जांच और नमूना रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
- संतोष कुमार, एडीएम शामली
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जानिए... क्यों जारी किया जाता है सर्टिफिकेट
हलाल सर्टिफिकेट कोई सरकारी एजेंसी जारी नहीं करती। जमीअत उलेमा-ए-हिंद के साथ-साथ कई ट्रस्ट भी इस प्रमाण पत्र को जारी करते हैं। यह प्रमाणपत्र खासकर मुस्लिम वर्ग के लिए जारी किया जाता है। ताकि उन्हें भरोसा हो सके कि प्रोडक्ट में कोई ऐसी चीज नहीं है, जो हराम हो।