शामली। शहीदों की याद और बसंतोत्सव पर सर साहित्य समिति की ओर से काव्य संध्या का आयोजन किया गया। कवियों ने अपनी रचनाएं सुनाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
बुढ़ाना रोड पर कवि प्रीतम सिंह प्रीतम के आवास पर हुए कार्यक्रम में कवि सम्मेलन की अध्यक्षता सरदार मंजीत सिंह गाजियाबादी ने की। मुख्य अतिथि हास्य कवि त्रिलोक चंद और विशिष्ट अतिथि सरदार राजेंद्र सिंह रहे। रोचक एवं ओजस्वी संचालन प्रीतम सिंह प्रीतम ने किया।
काव्य संध्या का शुभारंभ हास्य कवि अनिल धीमान पोपट कामचोर ने सरस्वती वंदना के साथ किया। जैनब ने शहीदों को समर्पित श्रद्धांजलि गीत सुनाते हुए पढ़ा, भारती का मान स्वाभिमान तिरंगा, आन मेरी शान मेरी जान तिरंगा, उड़ान तिरंगे की कौन रोक सकेगा ईसाई, सिक्ख, हिंदू, मुसलमान तिरंगा।
इसके बाद कवि प्रदीप टांक मायूस ने कहा चंदा की शक्ल हूबहू होती है बेटियां, बेटों की तरह लाड़ली होती है बेटियां, बेटी के होने पर कभी मायूस न होना, बेटों से ज्यादा कीमती होती हैं बेटियां। प्रमोद नील कमल ने श्रृंगार रस की रचना पढ़ते कहा खय्याम की रुबाई हो तुम, या बच्चन की मधुशाला, कभी मुझे हनी गर्ल लगे, कभी लगे मधुबाला।
कवि प्रीतम सिंह प्रीतम ने वैलेंनटाइन-डे को प्रेम के दायरे से जोड़ते हुए पढ़ा, प्रेम का अर्थ है परे अहम, तो अहंकार का दमन करो, पूर्ण समर्पण और निष्ठा से सच्चे प्रेम का वरन करो, सच्चा प्रेम जिसकी तृप्ति देश समर्पण आधारित, जाति पांति से ऊपर उठकर ईश्वर तक हो व्यवहारिक, आदर और बड़ों की सेवा जिस अर्पण में हो शामिल, पूर्वजों पर गर्व जिसे है सच्चे प्रेम के वो काबिल।
युवा कवियत्री इफ्फत जहां ने पढ़ा- इसकी खातिर सीने पे गोली खाई देश की आजादी तब ही तो है आई, इसकी रक्षा में देंगे अपनी जान, मेरा प्या देश है हिंदुस्तान। हास्य कवि मंजीत सिंह गाजियाबादी ने पढ़ा - किसे अपना बनाएं कोई इस काबिल नहीं मिलता, पत्थर बहुत मिलते हैं लेकिन दिल नहीं मिलता, वो मेरा हाल क्यों पूछे वो मुझ पर मेहरबां क्यों हो, जिनको हुस्न मिलता है उनको दिल नहीं मिलता। बुढ़ाना से आए कवि प्रमोद कुमार ने पढ़ा, अगर चाहिए तुम्हें सुरक्षा चौकन्ना रहना होगा, देश द्रोही गद्दारों से सावधान रहना होगा, ढूंढ ढूंढकर द्रोहियों को फांसी पर लटकाना होगा।
कांधला से आए चतर सिंह निडर ने देश और प्रदेश की अव्यवस्थाओं पर कुठाराघात करते हुए पढ़ा - स्पष्ट बहुमत में अपनी सरकार फिर काहे का डर है यार, कत्ल करो चाहे लूटो देश, अपहरण करो सरे बाजार। इनके अलावा खेड़ीकरमू से आए कवि अमन कुमार, कवि श्रीकांत शर्मा, कवियत्री शाहिन, पंडित राजीव भावज्ञ झाल, रविकांत शर्मा, शिवम रंगीला ने भी अपनी रचनाएं पढ़ीं।
मौके पर हर्ष धीमान, नीटू कुमार कश्यप, हर्षित धीमान, योगेंद्र मलिक, बुद्ध प्रकाश, अजय शर्मा, अंकित कुमार, आयुषी, प्रीति, आयुष धीमान आदि मौजूद रहे।